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जंगल में जुआ खेलते
जंगल में जुआ खेलते
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जुए का खेल : जंगल बना मिनी कसीनो, पुलिस के जवान ही सिविल ड्रेस में पत्तों के साथ मिले 

दंतेवाड़ा जिले के डेगलरास और मेटनार के जंगलों में अवैध जुए के बड़े अड्डे चलने के आरोप लगाए गए हैं, जहाँ कथित तौर पर रोज़ लाखों रुपये का दांव लगाया जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस गतिविधि में कुछ पुलिसकर्मियों और एक पूर्व एएसआई की संलिप्तता भी सामने आई है, जो जुआ संचालित करने और “सेटिंग” कराने में भूमिका निभा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दो पुलिसकर्मियों को जुआ खेलते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया है, जिसके बाद विभाग पर सवाल उठे हैं। आरोप यह भी है कि छापेमारी की सूचना पहले ही लीक हो जाने से जुआरी बच निकलते हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
03 May 2026, 05:57 PM
📍 दंतेवाड़ा

दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए जुए का एक ऐसा काला साम्राज्य खड़ा हो गया है, जिसकी कमान कथित तौर पर वर्दीधारियों के हाथ में है। जिले के डेगलरास और मेटनार के जंगलों में इन दिनों तिरपाल के नीचे लाखों रुपए के दांव लग रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने और संचालित करने में खुद पुलिसकर्मी शामिल हैं।

वीडियो में बेनकाब हुए पुलिस के 'खिलाड़ी'

हाल ही में जुए के इस अड्डे का एक वीडियो सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में सिटी कोतवाली में तैनात एक आरक्षक भुनेश्वर भंडारी और एक बर्खास्त एएसआई (ASI) गीता सिंह बंजारे स्पष्ट रूप से जुआ खेलते नजर आ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, ये दोनों न केवल खुद दांव लगा रहे हैं, बल्कि बाहरी जुआरियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के बीच 'सेटिंग' कराने का मुख्य जरिया भी बने हुए हैं। वर्दी की आड़ में चल रहे इस खेल ने विभाग की छवि पर गहरा दाग लगा दिया है।

लाखों का टर्नओवर और 15 मई का बड़ा प्लान

वर्तमान में मेटनार और डेगलरास के जंगलों में दोपहर 2 बजे से फड़ सजता है, जो पूरी रात चलता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार:

  • दैनिक दांव: अभी हर दिन करीब 10 लाख रुपए से अधिक का हार-जीत का खेल हो रहा है।

  • आगामी योजना: 15 मई के बाद यहाँ एक 'महा-फड़' आयोजित करने की तैयारी है, जिसमें रोजाना 40 से 50 लाख रुपए का दांव लगने का अनुमान है।

  • अंतरराज्यीय नेटवर्क: इस बड़े आयोजन के लिए पड़ोसी जिलों—सुकमा, बीजापुर और बस्तर—से भी बड़े जुआरियों को आमंत्रित किया गया है। वर्तमान में दंतेवाड़ा, बचेली और गीदम के सटोरिए यहाँ सक्रिय हैं।

पुलिस की छापेमारी और 'विभीषणों' की मुखबिरी

हैरानी की बात यह है कि जुए का यह अड्डा सिटी कोतवाली से कुछ ही दूरी पर स्थित है, फिर भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। दो दिन पहले जब एक वीडियो सामने आने के बाद आला अधिकारियों ने टीम भेजी, तो जुआरियों को पहले ही इसकी भनक लग गई।

"पुलिस टीम के पहुँचने से पहले ही विभाग के किसी 'विभीषण' ने जुआरियों को अलर्ट कर दिया। जब टीम मौके पर पहुँची, तो वहाँ केवल ताश की पत्तियाँ और खाली शराब की बोतलें ही मिलीं। जुआरी सुरक्षित भाग निकलने में कामयाब रहे।"

पुरानी आदत: एकता परिसर से डेगलरास का सफर

यह पहली बार नहीं है जब दंतेवाड़ा पुलिस की मिलीभगत सामने आई है। इससे पहले जिला मुख्यालय के एकता परिसर में खुलेआम जुआ खेला जाता था। तब भी पुलिस की मासिक 'सेटिंग' की खबरें सुर्खियों में रही थीं। भारी दबाव के बाद पुलिस ने वहाँ कार्रवाई तो की, लेकिन जुआरियों ने अपना ठिकाना बदलकर डेगलरास के घने जंगलों को चुन लिया, जहाँ पहुँच पाना मुश्किल है और सुरक्षा के लिहाज से जुआरियों के लिए मुफीद है।

प्रशासनिक रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी आरके बर्मन ने सख्त लहजे में कहा है कि जुआ एक सामाजिक बुराई है और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है और उन पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा।

अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? दंतेवाड़ा में जिस तरह से पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में लाखों का जुआ चल रहा है, वह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है। अब देखना यह होगा कि 15 मई को होने वाले 'महा-फड़' पर प्रशासन की गाज गिरती है या 'सेटिंग' का यह खेल जारी रहता है।

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