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बड़ी कार्रवाई : छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी ने 13 ठिकानों पर मारे छापे, 5.39 करोड़ की बरामदगी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच के तहत रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर में 13 ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में लगभग 53 लाख रुपये नकद और 3.234 किलोग्राम सोना (करीब 5.39 करोड़ रुपये मूल्य) बरामद हुआ, साथ ही कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए। जांच ईओडब्ल्यू और एसीबी की एफआईआर के आधार पर पीएमएलए के तहत की जा रही है। आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच शराब कारोबार में संगठित तरीके से अवैध कमीशन लिया गया, जिससे करीब 2,883 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित हुई।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 03 May 2026, 05:28 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 11:33 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में चल रहे कथित शराब घोटाले की जांच को लेकर एक और बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने दावा किया है कि 30 अप्रैल को की गई व्यापक छापेमारी में कई अहम सुराग और बड़ी मात्रा में संपत्ति बरामद हुई है, जो इस पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ाती है।

ईडी की टीम ने रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर जिलों में एक साथ 13 अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। ये सभी स्थान शराब कारोबार से जुड़े व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, विभिन्न व्यवसायियों और कॉर्पोरेट संस्थाओं से संबंधित बताए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, इन पर आरोप है कि ये लोग कथित घोटाले से अर्जित अवैध धन को हासिल करने, उसे छिपाने, स्थानांतरित करने या उसके स्वरूप में बदलाव करने में शामिल हो सकते हैं।

छापेमारी में नकदी और सोने की बड़ी बरामदगी

तलाशी अभियान के दौरान ईडी को बड़ी सफलता हाथ लगी। कार्रवाई में लगभग 53 लाख रुपये नकद और करीब 3.234 किलोग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 4.86 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस तरह कुल जब्ती की राशि लगभग 5.39 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और डेटा भी जब्त किए गए हैं, जिनकी गहन जांच और विश्लेषण जारी है।

एफआईआर और पीएमएलए के तहत जांच

यह मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) रायपुर द्वारा दर्ज मूल एफआईआर से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि 2019 से 2022 के बीच राज्य में शराब की खरीद, वितरण, लाइसेंसिंग और बिक्री प्रणाली के जरिए एक संगठित तरीके से अवैध कमीशन वसूला गया था।

2,883 करोड़ रुपये की अवैध आय का अनुमान

अब तक की जांच में एजेंसियों का अनुमान है कि इस पूरे घोटाले से लगभग 2,883 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित की गई। यह रकम कथित तौर पर एक सुनियोजित नेटवर्क के जरिए विभिन्न स्तरों पर बांटी और घुमाई गई।

गिरफ्तारियां और जांच का बढ़ता दायरा

ईडी ने अब तक इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, तत्कालीन आबकारी विभाग के शीर्ष पदाधिकारी, एक पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े व्यक्ति और उनके तत्कालीन सहयोगी अधिकारी शामिल हैं। जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसमें शराब डिस्टिलर, हवाला नेटवर्क, नकद प्रबंधन से जुड़े लोग और लाइसेंसधारी भी शामिल पाए जा रहे हैं।

380 करोड़ की संपत्तियों पर कुर्की कार्रवाई

इसके साथ ही ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत लगभग 380 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने के लिए छह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर भी जारी किए हैं। इनमें रियल एस्टेट, बैंक बैलेंस, वाहन, गहने और शेयर जैसी संपत्तियां शामिल हैं। कई मामलों में अदालत ने इन कुर्कियों को मंजूरी भी दे दी है।

अदालत में अभियोजन शिकायतें दाखिल

एजेंसी ने रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में अब तक छह अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की हैं, जिनमें 81 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। ये मामले फिलहाल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी खुलासे और कार्रवाई संभव है।

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