Wednesday, 04 Nov 2026 भारत
ब्रेकिंग
Woman Death Case: बाफना हाउस में युवती की मौत से मचा हड़कंप, न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग CG News: हाइवा में आग लगते ही मचा हड़कंप, ड्राइवर की सूझबूझ से बची जान Mahadev Betting App: सौरभ चंद्राकर रायपुर कोर्ट में पेश, बढ़ेगी पूछताछ, हवाला नेटवर्क और रसूखदारों पर नजर Korba News: महुआ शराब जब्ती के दौरान आबकारी टीम से मारपीट, दो महिलाएं गिरफ्तार School News: परिसर में मासूम को फेंकने और झूठे केस में फंसाने की धमकी का वीडियो वायरल Road Accident: तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से युवक और युवती की मौत Woman Death Case: बाफना हाउस में युवती की मौत से मचा हड़कंप, न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग CG News: हाइवा में आग लगते ही मचा हड़कंप, ड्राइवर की सूझबूझ से बची जान Mahadev Betting App: सौरभ चंद्राकर रायपुर कोर्ट में पेश, बढ़ेगी पूछताछ, हवाला नेटवर्क और रसूखदारों पर नजर Korba News: महुआ शराब जब्ती के दौरान आबकारी टीम से मारपीट, दो महिलाएं गिरफ्तार School News: परिसर में मासूम को फेंकने और झूठे केस में फंसाने की धमकी का वीडियो वायरल Road Accident: तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से युवक और युवती की मौत
W 𝕏 f
होम › रायपुर › CG Tradition: गौरा-गौरी विवाह, सुआ गीत और राउत ना…
Gaura-Gauri wedding and traditional ritual procession (Image Source: Social Media)
Gaura-Gauri wedding and traditional ritual procession (Image Source: Social Media)
रायपुर

CG Tradition: गौरा-गौरी विवाह, सुआ गीत और राउत नाचा... छत्तीसगढ़ के गांवों में आज भी जीवंत हैं दिवाली की अनूठी परंपराएं

CG Tradition: छत्तीसगढ़ के गांवों में दिवाली का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोकसंस्कृति के साथ मनाया जाता है। धनतेरस से भाई दूज तक गौरा-गौरी विवाह, सुआ नृत्य, सोहई गीत और राउत नाचा जैसी परंपराएं उत्सव को खास बनाती हैं।

रोशनी पटेल | कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 04 Nov 2026, 03:02 PM · 7 मिनट पढ़ने का समय
रायपुूर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CG Tradition: दीपों का पर्व दिवाली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सामाजिक एकता और सदियों पुरानी परंपराओं को संजोने का अवसर भी है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में दिवाली का उत्सव अपनी खास सांस्कृतिक पहचान के साथ मनाया जाता है। यहां धनतेरस से लेकर भाई दूज तक हर दिन की अलग परंपरा है। कहीं गौरा-गौरी की पूजा होती है, तो कहीं सुआ गीत, राउत नाचा और पारंपरिक विवाह गीतों से गांव का माहौल उत्सवमय हो जाता है। आइए जानते हैं, छत्तीसगढ़ के गांवों में किस तरह मनाई जाती है दिवाली।

दिवाली से जुड़ी हैं कई धार्मिक मान्यताएं

दिवाली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व के पीछे कई धार्मिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद इसी दिन अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर पूरी नगरी को रोशन किया था।

धनतेरस पर होती है मां लक्ष्मी की पूजा, शुरू होती हैं गौरा-गौरी की तैयारियां

दिवाली उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी तथा भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। शाम के समय घरों के दरवाजे पर 13 दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। छत्तीसगढ़ के कई गांवों में इस दिन गौरा-गौरी उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। परंपरा के अनुसार, सुबह ग्रामीण तालाब या नदी के किनारे से गौरा-गौरी की मूर्तियां बनाने के लिए मिट्टी लेकर आते हैं।  
 गौरी-गौरा विसर्जन   

गौरा-गौरी विवाह कब मनाया जाता है और क्या है महत्व  

  • गौरा को भगवान शिव और गौरी को माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है।
  • मिट्टी से दोनों की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं।
  • पारंपरिक विवाह गीत गाकर विवाह की रस्में निभाई जाती हैं।
  • ग्रामीण बारात निकालते हैं और विवाह के बाद पूजा-अर्चना करते हैं।
  • अगले दिन बाजे-गाजे के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
इस परंपरा को सुख-समृद्धि, पारिवारिक खुशहाली और सामाजिक एकता से जोड़कर देखा जाता है। गोंड समुदाय में इसकी विशेष पहचान है, लेकिन समय के साथ यह छत्तीसगढ़ के अनेक ग्रामीण समुदायों का साझा लोकपर्व बन गया है।
सुवा नृत्य करते   

क्या है इसका महत्व

सुआ का अर्थ है तोता। इस नृत्य में मिट्टी या लकड़ी के तोते को टोकरी में रखकर महिलाएं उसके चारों ओर गोल घेरा बनाती हैं।
  • महिलाएं तालियों की थाप पर सुआ गीत गाती हैं।
  • इन गीतों में प्रेम, विरह, पारिवारिक जीवन और महिलाओं की भावनाओं को अभिव्यक्त किया जाता है।
  • यह नृत्य मूल रूप से गोंड आदिवासी महिलाओं की लोकपरंपरा से जुड़ा है।
  • फसल कटाई के मौसम में महिलाएं घर-घर जाकर गीत गाती हैं और धान या अन्य उपहार एकत्र करती हैं।
इससे प्राप्त अनाज या राशि का उपयोग कई स्थानों पर सामूहिक भोज और गौरा-गौरी उत्सव की तैयारियों में किया जाता रहा है। सुआ नृत्य कृषि जीवन और महिलाओं की सामूहिक भागीदारी का सुंदर उदाहरण है।
रावत नाचा   

क्या है इसका महत्व 

  • राउत नाचा यादव समाज की पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत है।
  • इस नृत्य में पुरुष पारंपरिक वेशभूषा पहनकर हाथों में लाठियां लेकर समूह में नाचते हैं।
  • नृत्य के दौरान दोहे, लोकगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन सुनाई देती है।
  • मातर पर्व पर पशुधन की पूजा और ग्रामीण जीवन से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व होता है।
  • यह नृत्य समाज में आपसी भाईचारे, एकता और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करता है।
राउत नाचा को केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि यादव समाज के इतिहास, वीरता, परंपरा और सामूहिक पहचान की अभिव्यक्ति माना जाता है।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
इस लेख में कोई त्रुटि दिखी? सुधार का अनुरोध करें
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़ ▾
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग ▾
दुर्ग संभाग ▾
बिलासपुर संभाग ▾
सरगुजा संभाग ▾
बस्तर संभाग ▾
देश ▾
विदेश
सरकारी सूचना ▾
राजनीति ▾
खेल ▾
मनोरंजन ▾
कारोबार ▾
कीर्तिमान विशेष ▾
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें