CG High Court:आवारा कुत्तों के प्रबंधन, नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण को लेकर न्यायिक निगरानी तेज हो गई है। डॉग-बाइट की घटनाओं पर रोक लगाने और कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की स्थिति अब राज्य सरकार को शपथपत्र के माध्यम से बतानी होगी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
नसबंदी से लेकर टीकाकरण तक की देनी होगी जानकारी
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव की ओर से पेश शपथपत्र पर विचार करते हुए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख किया था। इनमें एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर, डॉग शेल्टर, नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम, फीडिंग स्पेस की पहचान, अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा, पेट्रोलिंग टीम, हेल्पलाइन और जनजागरूकता अभियान शामिल हैं। हालांकि, अदालत ने आवारा कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन और डॉग-बाइट की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इन व्यवस्थाओं को सभी जिलों में प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता बताई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर मांगा गया जवाब
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश के.आर. महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास अदालत में उपस्थित रहे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 को स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज सिविल रिट याचिका क्रमांक 5/2025 और इससे जुड़े मामलों में सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर अनुपालन शपथपत्र मांगा था। इसके साथ ही सभी हाईकोर्ट को अपने-अपने राज्यों में इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
जिलेवार आंकड़े और शिकायतों के निराकरण का देना होगा ब्योरा
हाईकोर्ट ने पहले ही मुख्य सचिव को संबंधित विभागों, नगरीय निकायों और जिला प्रशासन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों तथा एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। अब राज्य सरकार को नए शपथपत्र में कई महत्वपूर्ण जानकारियां देनी होंगी। इसमें जिलेवार आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण की संख्या, एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर एवं शेल्टर की स्थिति, सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा के इंतजाम और हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के निराकरण का विवरण शामिल रहेगा।
हर चार महीने में भेजनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को हर चार महीने में अनुपालन की समेकित रिपोर्ट भेजने का निर्देश भी दिया है। ऐसे में अब राज्य सरकार के सामने आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े इंतजामों की वास्तविक स्थिति और उनके प्रभावी क्रियान्वयन का ब्योरा प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में निर्धारित है। उस दौरान राज्य में नसबंदी, टीकाकरण और डॉग-बाइट की घटनाओं की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों की प्रगति पर आगे विचार किया जाएगा।







