Mahadev Betting App: सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ओमान से प्रत्यर्पण के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम कड़ी सुरक्षा के बीच उसे रायपुर की विशेष अदालत में लेकर पहुंची। अदालत में पेशी के बाद अब एजेंसी उसके रिमांड की मांग करने जा रही है, ताकि इस पूरे अवैध नेटवर्क की गहराई तक पहुंचकर इसके तार तलाशे जा सकें।
हवाला और रसूखदारों के गठजोड़ पर टिकी हैं निगाहें
जांच एजेंसियों का मानना है कि सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के बाद देशव्यापी हवाला नेटवर्क, विदेशी खातों और सट्टे के इस काले कारोबार से जुड़ी कई परतें उधड़ सकती हैं। सबसे बड़ा सवाल उन रसूखदारों को लेकर है—चाहे वे राजनीतिक गलियारों से जुड़े हों, पुलिस महकमे के हों या प्रशासनिक अमले के—जिन्हें इस अवैध कारोबार से कथित तौर पर 'प्रोटेक्शन मनी' (संरक्षण राशि) पहुंचाई जाती थी। हालांकि, अदालत में कार्यवाही के दौरान फिलहाल एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।
3 हजार से अधिक पैनलों का फैला था जाल
सामने आई जानकारी के मुताबिक, महादेव सिंडिकेट देश के सबसे बड़े और संगठित अवैध ऑनलाइन गेमिंग नेटवर्क के रूप में उभरा था। क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेल आयोजनों पर सट्टा लगवाने के लिए देश के कोने-कोने में 3,000 से ज्यादा अवैध पैनल और शाखाएं सक्रिय थीं। इस अवैध साम्राज्य से आने वाले काले धन को छिपाने के लिए पहले बेनामी या म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद मनी ट्रेल को उलझाने के लिए लेयरिंग कर इसे हवाला के रास्ते विदेशों में भेज दिया जाता था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूर्व में अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 94,400 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का अनुमान लगाया गया है।गिरफ्तारी के बाद भी इंटरनेट पर जिंदा हैं डोमेन
एक तरफ जहां सरगना कानून के शिकंजे में कसता जा रहा है, वहीं डिजिटल स्पेस में इस सिंडिकेट के डिजिटल पदचि पूरी तरह मिट नहीं पाए हैं। पड़ताल में यह बात सामने आई है कि 'महादेवऑनलाइन डॉट कॉम' और 'महादेवबुक्ज डॉट कॉम' जैसे कई डोमेन अभी भी इंटरनेट पर खुले हुए हैं। भले ही इनमें से मुख्य वेबसाइट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया हो, लेकिन लोग आज भी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) यानी प्रॉक्सी का सहारा लेकर इसे धड़ल्ले से एक्सेस कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल 2021 में रजिस्टर किया गया यह डोमेन वर्ष 2027 तक के लिए वैध है और इसका तकनीकी सर्वर लोकेशन मुंबई दर्ज है, जो साइबर सुरक्षा पर भी कई सवाल खड़े करता है।






