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Chhattisgarh High Court ruling on divorce(Image Source: AI Photo)
Chhattisgarh High Court ruling on divorce(Image Source: AI Photo)
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CG High Court: पति को भिखारी कहने का आरोप, हाईकोर्ट ने पलटा फैमिली कोर्ट का फैसला

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जगदलपुर के एक वैवाहिक विवाद में लगातार अपमान, झगड़े और गंभीर अविश्वास के संयुक्त प्रभाव को मानसिक क्रूरता माना। पति ने पत्नी पर भिखारी कहकर अपमानित करने और मारपीट करने के आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के 10 दिसंबर 2022 के फैसले को निरस्त करते हुए पति की अपील स्वीकार की और तलाक की डिक्री प्रदान कर दी।

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प्रकाशित: 15 Oct 2026, 03:46 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
CG High Court: पति को बार-बार भिखारी कहना, गाली-गलौज करना और आए दिन झगड़े करना वैवाहिक जीवन को किस हद तक प्रभावित कर सकता है, इसका एक मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सामने आया है। जगदलपुर के एक दंपती के विवाद में हाईकोर्ट ने लगातार अपमान, झगड़े और गंभीर अविश्वास के संयुक्त प्रभाव को मानसिक क्रूरता माना। अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के पुराने फैसले को निरस्त करते हुए पति की अपील स्वीकार कर तलाक की डिक्री प्रदान कर दी।

कम आमदनी को लेकर ताने देने का आरोप

मामला जगदलपुर निवासी एक दंपती से जुड़ा है। पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(क) के तहत पत्नी से तलाक की मांग की थी। उसका आरोप था कि पत्नी कम आमदनी को लेकर उसे ताने देती थी और भिखारी कहकर अपमानित करती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट करती थी। पति के मुताबिक, इन विवादों के कारण उसका वैवाहिक जीवन लगातार तनावपूर्ण हो गया था। उसने इसी आधार पर पारिवारिक न्यायालय में विवाह समाप्त करने की मांग की थी।

पारिवारिक न्यायालय ने खारिज कर दी थी याचिका

पति की तलाक याचिका पर पारिवारिक न्यायालय ने 10 दिसंबर 2022 को फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया था। इस फैसले से असंतुष्ट पति ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पति ने पत्नी के कथित व्यवहार और वैवाहिक जीवन में लगातार होने वाले विवादों का हवाला दिया। वहीं, पत्नी ने पति के आरोपों को खारिज करते हुए पति और उसके परिजनों पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया।

लगातार झगड़े और अविश्वास को माना मानसिक क्रूरता

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि दंपती के बीच लगातार झगड़े होते थे। उनके बीच गंभीर अविश्वास था और परिवार के सदस्यों के साथ संबंध भी तनावपूर्ण बने हुए थे। साथ रहने के तौर-तरीकों को लेकर भी बार-बार विवाद सामने आए।अदालत ने माना कि पारिवारिक न्यायालय साक्ष्यों के समग्र प्रभाव का उचित आकलन करने में विफल रहा था। केवल अलग-अलग घटनाओं को देखने के बजाय यह समझना जरूरी था कि पति-पत्नी के व्यवहार का पूरे वैवाहिक जीवन पर क्या असर पड़ा।

हाईकोर्ट ने निरस्त किया पुराना फैसला

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के 10 दिसंबर 2022 के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने पति की अपील स्वीकार करते हुए मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की डिक्री प्रदान की। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर छोटी-मोटी अनबन या वैवाहिक मतभेद को मानसिक क्रूरता नहीं कहा जा सकता। किसी मामले में फैसला करते समय पति-पत्नी के व्यवहार और घटनाओं के पूरे वैवाहिक जीवन पर पड़ने वाले संयुक्त प्रभाव को देखना आवश्यक है। इस मामले में अदालत ने माना कि लगातार विवाद, अपमान और गंभीर अविश्वास से पति को हुआ मानसिक कष्ट सामान्य वैवाहिक मतभेदों से अधिक था। इसी निष्कर्ष के आधार पर तलाक को उचित माना गया।
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