CG High Court News: छत्तीसगढ़ में शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण से जुड़े विवाद पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। विवाद पूरी तरह दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ देने के प्रावधान से जुड़ा है।
इस भर्ती के तहत कुल 2,292 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं। इनमें ई-संवर्ग के 795 और टी-संवर्ग के 1,497 पद शामिल हैं। सहायक शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर और शिक्षक भर्ती परीक्षा 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित होनी थी। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा कार्यक्रम को लेकर अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
राज्य में शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था और विज्ञापन की शर्तों को चुनौती देते हुए मीनाक्षी मांगलेकर एवं दो अन्य अभ्यर्थियों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रूंगटा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांगता की श्रेणियों के अनुसार आरक्षित पदों का निर्धारण उचित तरीके से नहीं किया गया। खास तौर पर पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था से बाहर रखे जाने का मुद्दा उठाया गया।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए भर्ती में शामिल होने के अवसर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और आरक्षण प्रावधानों का हवाला देते हुए इस व्यवस्था को चुनौती दी।
समाज कल्याण विभाग की अधिसूचना से कैसे पैदा हुआ विवाद?
मामले में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, समाज कल्याण विभाग ने 25 फरवरी 2026 को दिव्यांगता की चिन्हांकित श्रेणियों से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। इसी के आधार पर भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों की श्रेणियां निर्धारित की गईं। उस सूची में सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी (B) को शामिल नहीं किया गया था।
इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने 16 अप्रैल 2026 को सहायक शिक्षक भर्ती का संक्षिप्त विज्ञापन जारी किया। 24 जुलाई 2026 को विस्तृत विज्ञापन भी जारी कर दिया गया। इस बीच ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
समाज कल्याण विभाग ने 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी की, जिसमें पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी (B) को सहायक शिक्षक पद के लिए चिन्हांकित दिव्यांगता की श्रेणियों में शामिल किया गया। हालांकि, तब तक भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। इसी वजह से संशोधित प्रावधानों को मौजूदा भर्ती में लागू करने का सवाल खड़ा हुआ।
हाईकोर्ट में सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2019 के पत्र और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण संबंधी प्रावधानों का मुद्दा उठाया गया।सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों का श्रेणीवार विभाजन करने के संबंध में शुद्धिपत्र जारी करने को तैयार है। शुद्धिपत्र का प्रारूप भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की जानकारी दी गई।
विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि संशोधित अधिसूचना के अनुसार भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी (B) के अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा।
2,292 पदों पर होनी है भर्ती
छत्तीसगढ़ में शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती के तहत कुल 2,292 पदों पर नियुक्तियां प्रस्तावित हैं। पदों का संवर्गवार विवरण इस प्रकार है:
- ई-संवर्ग: 795 पद
- टी-संवर्ग: 1,497 पद
- कुल पद: 2,292
सहायक शिक्षक पदों के लिए लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर 2026 को निर्धारित थी, जबकि शिक्षक पदों की परीक्षा 25 अक्टूबर 2026 को होनी थी। हाईकोर्ट की रोक के बाद दोनों परीक्षाओं के कार्यक्रम पर असर पड़ने की आशंका है।
11 अक्टूबर की परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस
सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा की तारीख नजदीक होने के कारण अभ्यर्थियों के सामने स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। कई उम्मीदवार परीक्षा की तैयारी पूरी कर चुके हैं, जबकि दूरस्थ परीक्षा केंद्र आवंटित होने के कारण कुछ अभ्यर्थियों ने यात्रा की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
अब परीक्षा स्थगित होगी या भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई नया कार्यक्रम जारी किया जाएगा, यह अदालत के आदेश और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा। अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे परीक्षा से संबंधित किसी भी बदलाव के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल और संबंधित विभागों की आधिकारिक सूचना पर नजर रखें।
फिलहाल, इस मामले का केंद्र दिव्यांग अभ्यर्थियों को समान अवसर देने और भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी प्रावधानों के पालन का सवाल है। आगे की सुनवाई और हाईकोर्ट के निर्देशों से भर्ती प्रक्रिया की अगली दिशा स्पष्ट होगी।

