भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन निम्नलिखित जानकारियों को तुरंत सार्वजनिक करे:
विभागवार रिक्तियों और आरक्षण की स्पष्ट स्थिति।
शॉर्टलिस्टिंग का दायरा और पात्रता मानदंड।
शिक्षण, शोध अनुभव और साक्षात्कार के अंकों के मूल्यांकन का आधार।
अकादमिक समुदाय का स्पष्ट मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियों का एकमात्र पैमाना योग्यता, शोध कार्य और निर्धारित मानक होना चाहिए। क्षेत्रीय भेदभाव या नियमों से परे जाकर की गई नियुक्तियां संस्थान की साख को सीधा नुकसान पहुंचाती हैं।
योग्य विषय को छोड़, दूसरे विषय के अभ्यर्थी को दी नौकरी" — पीड़ित अभ्यर्थी का छलका दर्द
प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थी नमन शुक्ला ने प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। नमन का कहना है कि जिस विषय के लिए पद विज्ञापित किया गया था, उसे दरकिनार कर किसी अन्य विषय के उम्मीदवार का चयन कर लिया गया।
नमन शुक्ला के अनुसार:
विश्वविद्यालय के UTD में UGC इनोवेटिव प्रोग्राम के तहत M.Tech. (ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेजर टेक्नोलॉजी) के सहायक प्राध्यापक पद के लिए भर्ती निकाली गई थी। इस विषय में M.Tech. और Ph.D. धारक योग्य स्थानीय उम्मीदवार मौजूद थे। इसके बावजूद, Electrical & Electronics में M.Tech. और Signal Processing में Ph.D. करने वाले अभ्यर्थी को चुन लिया गया। जब मैं इसका जवाब मांगने प्रशासनिक भवन गया, तो कोई सुनवाई नहीं हुई। भारी बारिश में दिनभर प्रदर्शन करने के बाद मुझे पुलिस का डर दिखाकर वहां से हटवा दिया गया।"
60 पदों की भर्ती में धांधली का दावा, राज्यपाल और CM से शिकायत
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुल 60 पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, जिसमें:
प्रोफेसर: 10 पद
एसोसिएट प्रोफेसर: 25 पद
असिस्टेंट प्रोफेसर: 25 पद
इन सभी 60 पदों की चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पीड़ितों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
कुलपति की सफाई: "नियमानुसार हुई है पूरी प्रक्रिया"
उठ रहे तमाम विवादों और आरोपों पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि:
"विश्वविद्यालय में हुई सभी भर्तियां यूजीसी (UGC) के दिशा-निर्देशों और तय नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए की गई हैं। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और कहीं भी किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है।"
कांग्रेस हमलावर: 5 प्रमुख बिंदुओं पर जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार और विवि प्रशासन को घेरते हुए 5 प्रमुख मांगें रखी हैं:
2 वर्षों की भर्तियों की जांच: बीते दो सालों में हुई सभी शैक्षणिक नियुक्तियों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
दस्तावेजों का पुनः परीक्षण: चयनित अभ्यर्थियों के पात्रता दस्तावेजों और चयन आधार की निष्पक्ष समीक्षा हो।
लंबित भर्तियों की स्थिति: अटकी हुई भर्तियों की सूची और उनके लंबित रहने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए।
कुलपति के दस्तावेजों की जांच: कुलपति की नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों और पात्रता की भी जांच रिपोर्ट सामने लाई जाए।
अवकाश के फैसलों की पड़ताल: महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान कुलपति द्वारा लिए गए अवकाश और उस अवधि में पारित प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा की जाए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

