यू-डायस रिपोर्ट का दिया हवाला, घट रहे हैं सरकारी शिक्षक
दीपक बैज ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए यू-डायस प्लस (U-DISE+) के हालिया आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में लगातार शिक्षकों की संख्या कम होती जा रही है:
दो सालों में गिरावट: बीते दो वर्षों में प्रदेश में कुल 2,582 सरकारी शिक्षक कम हुए हैं।
वर्षवार आंकड़े:
वर्ष 2023-24 में शिक्षकों की संख्या 1,88,721 थी।
वर्ष 2024-25 में यह घटकर 1,88,578 पर आ गई।
वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक अब यह संख्या मात्र 1,86,139 रह गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पद खाली हो रहे हैं और शिक्षक कम हो रहे हैं, तो नई भर्तियां क्यों रोकी गई हैं?
बस्तर और सरगुजा में शिक्षा व्यवस्था बदहाल
शिक्षकों की कमी से पढ़ाई पर पड़ रहे असर का जिक्र करते हुए बैज ने कहा कि दूरस्थ अंचलों, खासकर बस्तर और सरगुजा संभाग के अलावा ग्रामीण इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। राज्य में एकल-शिक्षक (जहां पूरे स्कूल में सिर्फ एक मास्टर हों) और शिक्षक-विहीन (बिना किसी शिक्षक के) स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भारी कमी के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है और शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।
पूर्ववर्ती सरकार का दिया हवाला, दी आंदोलन की चेतावनी
अपनी बात रखते हुए बैज ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में 27,069 नियमित शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार के आते ही नियुक्तियों की रफ्तार थम गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की है कि:
प्रदेश के सभी रिक्त पदों पर तत्काल प्रभाव से पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
बस्तर, सरगुजा और ग्रामीण क्षेत्रों के सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
अंत में दीपक बैज ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। बेरोजगार युवाओं के हक और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक उग्र आंदोलन किया जाएगा।







