प्रबंधन और सरकार की सफाई: पीआईबी ने भी किया खंडन
दौरे की वजह: अडानी टोटल गैस के साथ प्राकृतिक गैस का समझौता
सियासी घमासान: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
भूपेश बघेल का हमला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर अब बीएसपी पर है और अडानी समूह के प्रतिनिधि संयंत्र का जायजा लेने आ रहे हैं। बघेल ने कहा— "बीएसपी छत्तीसगढ़ की आत्मा है, इसे किसी भी कीमत पर बिकने नहीं दिया जाएगा।" उन्होंने भिलाई की जनता से संयंत्र को बचाने के लिए तैयार रहने की अपील की।
विधायक देवेंद्र यादव का रुख: भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र केवल एक कारखाना नहीं, बल्कि लाखों लोगों की भावनाओं और यादों से जुड़ा है। उन्होंने साफ किया कि अडानी-अंबानी या किसी भी निजी घराने को इसे सौंपने की कोशिश का आखिरी सांस तक विरोध किया जाएगा।
भाजपा विधायक रिकेश सेन की चुनौती: वहीं, वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने चुनौती दी कि यदि कांग्रेस नेताओं के पास बीएसपी को बेचे जाने का कोई आधिकारिक दस्तावेज है, तो उसे सार्वजनिक करें। रिकेश सेन ने कहा कि यदि सच में संयंत्र के निजीकरण का कोई प्रयास होता है, तो वे स्वयं सबसे पहले विरोध में धरने पर बैठेंगे। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि झूठी अफवाहें फैलाने के विरोध में वे भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव के निवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
बघेल का पलटीवार: रिकेश सेन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा— "हमारे घर के बाहर धरना देने से क्या हासिल होगा? अगर भाजपा विधायक में हिम्मत है, तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सामने जाकर प्रदर्शन करना चाहिए। उन्हें पहले यह पता लगाना चाहिए कि केंद्र सरकार की विनिवेश सूची में नगरनार और भिलाई स्टील प्लांट की वास्तविक स्थिति क्या है।"






