🔴 BREAKING
दुर्ग संभाग
Featured
BSP Scrap Scam: भिलाई इस्पात संयंत्र 250 टन स्क्रैप चोरी मामले में सीबीआई करेगी जांच, राजपत्र में आदेश जारी
BSP Scrap Scam: भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में हुए करोड़ों रुपये के लौह स्क्रैप चोरी मामले की जांच अब CBI करेगी। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद केंद्रीय एजेंसी ने केस की पड़ताल शुरू कर दी है। इस मामले में अब तक 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 3.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी।
BSP Scrap Scam: भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में सामने आए करोड़ों रुपये के लौह स्क्रैप चोरी के बड़े घोटाले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथों में सौंप दी गई है। केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र (Gazette) में इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए जाने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस बहुचर्चित मामले में आधिकारिक तौर पर अपनी पड़ताल शुरू कर दी है। अब तक इस पूरे प्रकरण की कमान पुरानी
भिलाई थाना पुलिस के पास थी।
3.22 करोड़ रुपये की जब्ती और 21 आरोपी गिरफ्तार
यह मामला इस साल 26 मई को उस समय उजागर हुआ, जब पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने अकलोरडीह (खदानपारा) स्थित 'एके ट्रेडर्स' के गोदाम और हथखोज क्षेत्र में ताबड़तोड़ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बीएसपी से चोरी किया गया लगभग 250 टन लोहा, भारी गाड़ियां, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनरी जब्त की थी। जब्त की गई कुल संपत्ति की कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि संयंत्र से स्क्रैप बाहर निकालने के लिए फ्लाई ऐश और अन्य कचरे की आड़ ली जाती थी। बीएसपी के भीतर से गाड़ियों में माल लोड कर पहले इसे तय गोदामों तक पहुंचाया जाता था और फिर वहां से निजी उद्योगों में खपाने का एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था।
जीएम, कारोबारी और निजी कंपनी के डायरेक्टर भी शिकंजे में
जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी, इस गिरोह की परतें खुलती गईं। मामले में अब तक बीएसपी अधिकारियों, कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों और उद्योगपतियों समेत कुल 21 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
प्रमुख गिरफ्तारियों में ट्रांसपोर्टर संजय सिंह, उसका बेटा अभय सिंह, भाजपा नेता भास्कर मुदलियार, कारोबारी हिमांशु खंडेलवाल के अलावा बीएसपी के जीएम हिमांशु भूषण मलिक और कर्मचारी मनोज कुमार देवांगन शामिल हैं। मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 18 सितंबर को पुलिस ने रसमड़ा स्थित 'रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड' के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को धर दबोचा। दोनों पर आरोप है कि वे चोरी का स्क्रैप अपनी औद्योगिक इकाई में इस्तेमाल कर रहे थे। अदालत ने दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
बीएसपी प्रबंधन का एक्शन, तीन निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने भी सख्त कदम उठाए। जांच के घेरे में आए जीएम हिमांशु भूषण मलिक, गैर-कार्यपालक (Non-Executive) कर्मचारी धनंजय वर्मा और मनोज कुमार देवांगन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पुलिस ने संयंत्र के भीतर स्क्रैप यार्ड की सुरक्षा व्यवस्था, स्टॉक रजिस्टर, गाड़ियों की आवाजाही और गेट पास जारी करने की पूरी प्रक्रिया की गहन तकनीकी पड़ताल की है।पाँच आरोपियों को हाईकोर्ट से मिल चुकी है राहत
मामले में कानूनी पहलुओं की बात करें तो छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कुछ मुख्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है:
अग्रिम जमानत: अभय सिंह और हिमांशु खंडेलवाल।
नियमित जमानत: जीएम हिमांशु भूषण मलिक, उपेंद्र उर्फ पिंटू ओझा और बीएसपी के इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज कुमार देवांगन।
अदालत ने देवांगन की जमानत मंजूर करते हुए यह टिप्पणी की थी कि वह 9 जुलाई से जेल में थे, चार्जशीट समय पर पेश नहीं हुई थी और मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी थी।
विधायक रिकेश सेन की कोशिशें लाईं रंग
वैशाली नगर से विधायक रिकेश सेन इस पूरे घोटाले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर लगातार मुखर रहे। उन्होंने इस मुद्दे को न केवल विधानसभा में उठाने की तैयारी की, बल्कि केंद्र सरकार तक बात पहुंचाई। 20 जुलाई को विधायक सेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर बीएसपी में लंबे समय से चल रहे इस सिंडिकेट के खात्मे के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी। गृह मंत्रालय ने उनके पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए इसे आवश्यक कार्रवाई के लिए इस्पात मंत्रालय को प्रेषित किया था, जिसके बाद अब सीबीआई जांच का रास्ता साफ हुआ।
अब नए सिरे से कसा जाएगा शिकंजा
राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के साथ ही अब इस मामले की पूरी दिशा बदल गई है। सीबीआई की एंट्री से अब निम्नलिखित बिंदुओं पर नए सिरे से सूक्ष्म जांच होगी:
बीएसपी से स्क्रैप गायब करने का यह नेटवर्क कितने सालों से सक्रिय था?
संयंत्र के भीतर गेट पास और सुरक्षा जांच के किन-किन स्तरों पर मिलीभगत थी?
चोरी का लोहा किन-किन अन्य निजी फैक्ट्रियों तक पहुंचाया गया?
पुलिस द्वारा अब तक जुटाए गए तमाम कागजात, फॉरेंसिक सबूत, जब्त गाड़ियां और आरोपियों के बयान अब सीबीआई के हवाले किए जाएंगे, जो इस बहुचर्चित मामले में कई और बड़े चेहरों का पर्दाफाश कर सकती है।