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खाद कटौती के विरोध में किसानों का धरना प्रदर्शन
खाद कटौती के विरोध में किसानों का धरना प्रदर्शन
रायपुर संभाग

धरना प्रदर्शन : प्रति एकड़ खाद सीमा घटाने पर भड़के किसान, सोसायटी मैदान में प्रदर्शन

नारा, संडी और डिधारी गांवों के किसानों ने प्रति एकड़ रासायनिक खाद की मात्रा में कटौती के विरोध में सोसायटी मैदान में धरना प्रदर्शन किया। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पुरानी खाद वितरण व्यवस्था बहाल करने, पर्याप्त डीजल उपलब्ध कराने और नैनो खाद व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की। किसानों का कहना है कि कम खाद मिलने से उत्पादन घटेगा और खेती की लागत बढ़ेगी।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
18 May 2026, 04:28 PM
📍 आरंग

जिला सहकारी ब्रांच चंदखुरी के अधीनस्थ ग्रामीण सेवा समिति नारा पं. क्र. 1559 अंतर्गत ग्राम नारा, संडी एवं डिधारी के किसानों ने प्रति एकड़ रासायनिक खाद की मात्रा में की गई कटौती के विरोध में सोसायटी मैदान में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया। किसानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए सोसायटी अध्यक्ष तिलोचन साहू को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में किसानों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालय एवं वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुशंसा के आधार पर नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत प्रति एकड़ किसानों को केवल एक बोरी यूरिया, आधा बोरी डीएपी, एक बोरी पोटाश, दो बोतल नैनो यूरिया तथा एक बोतल नैनो डीएपी देने का प्रावधान किया गया है। किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था खेती की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं है।

धरना दे रहे किसानों ने कहा कि वर्षों तक शासन-प्रशासन द्वारा “अधिक अन्न उपजाओ” का नारा देकर किसानों को देशी खाद छोड़ रासायनिक खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। अब अचानक खाद की मात्रा घटा देने से फसल उत्पादन प्रभावित होगा। किसानों के अनुसार कम खाद मिलने से पैदावार घटेगी और खेती की लागत बढ़ जाएगी, जिससे खेती घाटे का सौदा बन सकती है।

नैनो खाद के उपयोग में व्यवहारिक कठिनाइयाँ

किसानों ने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग हर किसान के लिए आसान नहीं है। विशेष रूप से जिन किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वे इन उत्पादों का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाएंगे। ग्रामीण किसानों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है और इससे खेती-किसानी पर विपरीत असर पड़ेगा। ज्ञापन में किसानों ने मांग की कि पूर्व की तरह प्रति एकड़ दो बोरी यूरिया, दो बोरी डीएपी और एक बोरी पोटाश उपलब्ध कराया जाए। किसानों का कहना है कि पर्याप्त खाद मिलने से ही वे समय पर खेती कार्य कर सकेंगे और फसल उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।

डीजल संकट को लेकर भी जताई चिंता

किसानों ने ज्ञापन में डीजल संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। ट्रैक्टर धारक किसानों ने बताया कि खेती के मौसम में प्रतिदिन औसतन 50 लीटर डीजल की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल की कमी और लंबी कतारों के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने शासन से मांग की कि डीजल पंपों में किसानों के लिए अलग व्यवस्था की जाए तथा निर्धारित दर पर पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध कराया जाए। 

किसानों ने उम्मीद जताई कि शासन-प्रशासन उनकी न्यायोचित मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होंगे। धरना प्रदर्शन के दौरान कैलाश वर्मा, संदीप शर्मा, इंद्रकुमार चन्द्राकर, पवन वर्मा, नतेंद्र वर्मा सहित नारा, संडी और डिधारी गांवों के बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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