छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी फंडिंग का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में खुलासा हुआ है कि अमेरिका से करोड़ों रुपये की रकम राज्य के धमतरी और बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भेजी गई। शुरुआती जांच में करीब 6.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आई है, जिसे लेकर एजेंसी अब गहराई से जांच कर रही है। ED के मुताबिक, यह रकम विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में निकाली गई और इसका उपयोग किन गतिविधियों में हुआ, इसकी जांच जारी है। एजेंसी ने इस मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
अमेरिकी बैंक से जुड़े कार्ड का इस्तेमाल
ED की जांच में सामने आया है कि अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक से जुड़े डेबिट कार्ड भारत लाए गए थे। इन कार्डों का उपयोग देशभर के एटीएम से बार-बार कैश निकालने के लिए किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि पिछले कुछ वर्षों में इन्हीं कार्डों के जरिए छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर समेत वाम चरमपंथ (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में नकदी निकाली गई। ED ने इन ट्रांजेक्शन को “असामान्य” और “संदिग्ध” बताया है।
बेंगलुरु एयरपोर्ट से मिला सुराग
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब ED ने 18 और 19 अप्रैल को देशभर में सर्च ऑपरेशन चलाया। इसी दौरान बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ‘मीका मार्क’ नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि वह विदेशी बैंक डेबिट कार्ड के जरिए भारत में कैश निकालने के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। इसके बाद एजेंसी ने अलग-अलग राज्यों में 6 ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण सुराग जुटाए।
‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ से जुड़ा मामला
ED के अनुसार, यह पूरा मामला ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) नामक संगठन से जुड़ा हुआ है। यह संगठन ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से संबंधित गतिविधियों में संलग्न बताया गया है। हालांकि, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस फंडिंग का वास्तविक उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया, इसका अभी खुलासा नहीं किया गया है।
FCRA नियमों पर भी उठे सवाल
ED ने यह भी बताया कि जिस संगठन से यह फंडिंग जुड़ी है, वह विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है। ऐसे में विदेश से आए पैसों के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पैसे का इस्तेमाल कहीं अवैध गतिविधियों या नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में किसी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए तो नहीं किया गया।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
ED ने संकेत दिए हैं कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल एजेंसी की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि विदेशी फंडिंग का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और किन-किन लोगों या संस्थाओं की इसमें भूमिका रही।
फैक्ट बॉक्स:
- ₹6.5 करोड़ संदिग्ध विदेशी फंडिंग
- धमतरी और बस्तर में हुआ ट्रांजेक्शन
- अमेरिकी बैंक के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल
- बेंगलुरु एयरपोर्ट से एक संदिग्ध गिरफ्तार
- FCRA पंजीकरण नहीं, बढ़ी जांच की गंभीरता

