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प्रियंका गांधी की PC :  महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन का खेल था,  131वां संशोधन बिल गिरने पर सियासत तेज

लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस सामने आई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि यह विधेयक महिला आरक्षण के बजाय परिसीमन से जुड़ा था, जबकि सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़कर पेश किया। संसद में हुई बहस में संघीय ढांचे, जनगणना और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 19 Apr 2026, 01:15 AM · अपडेट: 25 Oct 2026, 09:44 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

लोकसभा में संविधान के 131वें संशोधन विधेयक पर हुई बहस ने देश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

संसद में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का तर्क था कि यह संशोधन भविष्य में महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए आवश्यक संवैधानिक आधार तैयार करेगा। सत्तापक्ष के कई सांसदों ने कहा कि विपक्ष का विरोध “महिला हितों के खिलाफ” है और यह राजनीतिक कारणों से प्रेरित है।

वहीं, विपक्ष ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। कांग्रेस, क्षेत्रीय दलों और अन्य विपक्षी नेताओं ने बहस के दौरान यह मुद्दा उठाया कि विधेयक का वास्तविक संबंध परिसीमन (Delimitation) से है। विपक्ष का कहना था कि सरकार जनगणना और विशेष रूप से जातिगत आंकड़ों को दरकिनार कर सीटों के पुनर्निर्धारण का रास्ता खोलना चाहती है, जिससे कुछ राज्यों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा हो सकता है।

उठाए ठोस कदम 

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद की बहस का हवाला देते हुए कहा कि यह महिला आरक्षण का बिल नहीं था, बल्कि परिसीमन से जुड़ा एक प्रयास था, जिसमें सरकार को मनमानी की पूरी गुंजाइश मिलती। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिला आरक्षण को लेकर गंभीर है, तो 2023 में सर्वसम्मति से पारित विधेयक को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

बहस के दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने यह भी चिंता जताई कि बिना स्पष्ट जनगणना आंकड़ों के परिसीमन करने से दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है। उन्होंने संघीय ढांचे के कमजोर होने का खतरा भी बताया। वहीं, सत्तापक्ष ने इन आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

विधेयक पर मतदान के समय विपक्षी एकजुटता साफ दिखाई दी, जिसके चलते सरकार इसे पारित कराने में सफल नहीं हो सकी। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। प्रियंका गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि महिलाओं के मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “सरकार ने सोचा था कि यदि विधेयक पास हो जाता है तो इसका श्रेय लेगी, और अगर नहीं होता है तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर राजनीतिक फायदा उठाएगी।

इस घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण, परिसीमन, और जनगणना जैसे मुद्दे फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले समय में यह विवाद और गहराने की संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सत्ता संतुलन से जुड़ा हुआ है।

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