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बोरे बासी पर सियासी घमासान : भूपेश बघेल ने मनाया दिवस, भाजपा ने बताया पिंडदान का प्रतीक

पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ इसे “बोरे बासी दिवस” के रूप में मनाया और इसे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक पहचान बताया। उन्होंने भाजपा सरकार पर विकास कार्यों और योजनाओं के प्रचार को लेकर आलोचना भी की। इसके जवाब में भाजपा के मंत्री Gajendra Yadav ने इस आयोजन को राजनीतिक प्रचार बताया और कांग्रेस पर तंज कसते हुए विवादित टिप्पणी की। कुल मिलाकर, यह मुद्दा अब एक पारंपरिक व्यंजन से बढ़कर छत्तीसगढ़ की पहचान और राजनीति की बहस का प्रतीक बन गया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 03 May 2026, 12:55 PM · अपडेट: 14 Sep 2026, 09:55 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

1 मई, अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और खान-पान एक बार फिर राजनीतिक अखाड़े के केंद्र में आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस दिन को 'बोरे बासी दिवस' के रूप में मनाते हुए अपनी सरकार के समय शुरू की गई इस परंपरा को आगे बढ़ाया, जिस पर सत्ताधारी दल भाजपा ने तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस का आयोजन: 'बोरे बासी' को बताया गर्मी का अमृत

दुर्ग स्थित राजीव भवन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पारंपरिक अंदाज में बोरे बासी का आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों को श्रमिक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए बोरे बासी के महत्व पर प्रकाश डाला।

भूपेश बघेल के संबोधन के मुख्य अंश:

  • पहचान की लड़ाई: उन्होंने कहा कि बोरे बासी छत्तीसगढ़ के किसानों और मजदूरों का मुख्य आहार है, जिसे उनकी सरकार ने आधिकारिक सम्मान दिलाकर 'बोरे बासी दिवस' की शुरुआत की थी।

  • स्वास्थ्य का खजाना: बघेल ने इसे "गर्मी का अमृत" बताते हुए कहा कि इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन होते हैं और यह लू से बचाने में कारगर है।

  • परंपरा का निर्वाह: उन्होंने संकल्प दोहराया कि सत्ता में रहें या न रहें, छत्तीसगढ़ की इस माटी की परंपरा को वे कभी नहीं छोड़ेंगे।

सरकार पर साधा निशाना

इस मौके पर बघेल ने वर्तमान भाजपा सरकार के 'सुशासन तिहार' जैसे आयोजनों पर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार केवल पिछली सरकार की योजनाओं के नाम बदलकर उत्सव मना रही है, जबकि धरातल पर विकास कार्य ठप्प पड़े हैं। उन्होंने बिजली और चावल जैसे विषयों पर मनाए जा रहे त्योहारों को केवल दिखावा करार दिया।

भाजपा का पलटवार: "क्या कांग्रेस का पिंडदान करने गए थे?"

दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री के इस आयोजन पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है। प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस पूरे आयोजन को महज एक 'प्रोपेगेंडा' बताया। उन्होंने भूपेश बघेल द्वारा मिट्टी के बर्तनों में बासी खाने पर सवाल उठाते हुए एक विवादास्पद बयान दिया।

मंत्री गजेंद्र यादव के तर्क:

  1. धार्मिक प्रतीक: यादव ने कहा कि हिंदू संस्कृति में मिट्टी के बर्तनों का विशेष उपयोग पिंडदान और पितृ भोज के समय किया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, "क्या भूपेश बघेल मिट्टी के बर्तन में खाकर कांग्रेस पार्टी का पिंडदान करने गए थे?"

  2. मानसिकता पर सवाल: भाजपा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस क्या साबित करना चाहती है? क्या वे चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के लोग हमेशा बासी खाकर ही गुजारा करें और प्रगति न करें?

छत्तीसगढ़ की राजनीति में 'बोरे बासी' अब केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि अस्मिता और राजनीति का प्रतीक बन चुका है। जहां कांग्रेस इसे छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान से जोड़ रही है, वहीं भाजपा इसे पुरानी सरकार का प्रचार और पिछड़ेपन को बढ़ावा देने वाला कदम बता रही है। श्रमिक दिवस के इस मौके पर शुरू हुई यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।

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