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भारतमाला प्रोजेक्ट : जमीन मुआवजा घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन, कारोबारी गोपाल गांधी के ठिकानों पर छापेमारी

ईडी ने भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपये के जमीन मुआवजा घोटाले में जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनके करीबियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच में आरोप है कि रायपुर–विशाखापत्तनम कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान कुछ अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से कृषि जमीनों को पुरानी तारीखों में गैर-कृषि दिखाकर ज्यादा मुआवजा लिया गया। साथ ही, जमीनों को छोटे टुकड़ों में बांटकर फर्जी तरीके से भुगतान लेने के भी आरोप हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
27 Apr 2026, 12:57 PM
रायपुर

भारतमाला परियोजना के तहत हुए बहुचर्चित जमीन मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह तड़के बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ईडी की टीम ने जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनके करीबियों के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर एक साथ दबिश दी है।

तड़के शुरू हुई कार्रवाई, दस्तावेजों की पड़ताल जारी

सूत्रों के मुताबिक, ईडी के लगभग 13 अधिकारियों की एक विशेष टीम इस ऑपरेशन को अंजाम दे रही है। जांच एजेंसी ने गोपाल गांधी के अभनपुर स्थित निवास और उनके व्यावसायिक कार्यालयों को अपने घेरे में ले लिया है। सूर्योदय से पहले शुरू हुई यह छापेमारी अभी भी जारी है, जिसमें टीम न केवल कागजी दस्तावेजों को खंगाल रही है, बल्कि कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जब्त कर रही है।

500 करोड़ का 'बैकडेट' खेल: क्या है पूरा मामला?

रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक की धांधली का आरोप है। ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की संयुक्त जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:

  • लैंड यूज का फर्जीवाड़ा: अधिकारियों ने दलालों के साथ सांठगांठ कर कृषि भूमि को 'बैकडेट' (पुरानी तारीखों) में गैर-कृषि (Commercial) घोषित कर दिया, ताकि मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया जा सके।

  • राजस्व विभाग की मिलीभगत: इस घोटाले में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

  • जमीन के टुकड़े: मुआवजे का पैसा हड़पने के लिए एक ही खसरा नंबर की जमीन को कागजों पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया और अलग-अलग नामों से फर्जी भुगतान कराया गया।

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