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छत्तीसगढ़

मानवता शर्मसार : दो नाबालिग आदिवासी बच्चियों से सामूहिक दुष्कर्म, 3 युवक गिरफ्तार और 3 नाबालिग हिरासत में

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में 24 अप्रैल को दो नाबालिग आदिवासी लड़कियों (13 और 15 वर्ष) के साथ सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात हुई। लड़कियां एक शादी समारोह से लौट रही थीं, तभी आरोपियों ने उन्हें अगवा कर सुनसान जगह पर उनके साथ दरिंदगी की।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
01 May 2026, 07:56 AM
सरगुजा

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां दो मासूम आदिवासी लड़कियों के साथ दरिंदगी की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि संलिप्त पाए गए तीन अन्य नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।

विवाह समारोह से लौटते समय हुई वारदात

घटना की शुरुआत 24 अप्रैल की रात को हुई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 13 और 15 वर्ष की दो नाबालिग लड़कियां अपनी सहेलियों के साथ एक विवाह कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौट रही थीं। इसी दौरान आरोपियों ने रास्ते में उन्हें घेर लिया और जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर एक सुनसान इलाके में ले गए। वहां आरोपियों ने उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

पीड़िता ने बताया कि उनकी दो अन्य सहेलियां किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहीं, लेकिन वे दोनों आरोपियों के चंगुल से नहीं निकल पाईं। अगले दिन घर पहुंचकर पीड़िता ने आपबीती सुनाई, जिसके बाद 26 अप्रैल को परिजनों ने सीतापुर थाने में मामला दर्ज कराया।

मेडिकल रिपोर्ट पर विवाद और पुलिस की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बच्चियों को मेडिकल जांच के लिए सीतापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। हालांकि, 28 अप्रैल को जब मेडिकल रिपोर्ट सामने आई, तो पीड़ितों के परिजनों ने उस पर असहमति जताई। स्थिति को भांपते हुए प्रशासन ने 29 अप्रैल को लड़कियों को दोबारा उच्च स्तरीय जांच के लिए जिला अस्पताल, अंबिकापुर भेजा।

पुलिस ने कड़ाई से जांच करते हुए तीन मुख्य आरोपियों— आनंद बेक, विकास उर्फ राहुल और मनीष खलखो को गिरफ्तार कर लिया है। इनके साथ ही वारदात में शामिल तीन नाबालिग लड़कों को भी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया है। सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

विपक्ष का हमला: "प्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं"

इस जघन्य अपराध ने राज्य की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला है।

  • सुरक्षा पर सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार महिलाओं और मासूम बच्चियों को सुरक्षित वातावरण देने में पूरी तरह विफल रही है।

  • बढ़ते अपराध: विपक्ष ने जशपुर, रायगढ़, कवर्धा और बालोद जैसी जगहों का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी बच्चियों के साथ बढ़ रही दरिंदगी की घटनाएं विचलित करने वाली हैं।

  • कानून व्यवस्था: विपक्ष के अनुसार, प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

फिलहाल, पुलिस की एक विशेष टीम मामले की बारीकी से जांच कर रही है ताकि सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। इस घटना ने एक बार फिर आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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