छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल में वन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्होंने विभाग की नाक के नीचे बेशकीमती सागौन के जंगलों को साफ कर दिया है। गौरेला परिक्षेत्र के पीपर खूंटी बीट में सागौन प्लांटेशन से 122 बहुमूल्य राष्ट्रीयकृत पेड़ों की अवैध कटाई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
रायपुर तक गूँजी गूँज, फ्लाइंग स्क्वाड ने की पुष्टि
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की शिकायत जब स्थानीय स्तर पर अनसुनी कर दी गई, तो इसकी सीधी शिकायत रायपुर स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ के नेतृत्व में एक विशेष फ्लाइंग स्क्वाड टीम गठित कर मौके पर भेजी गई। बिलासपुर वृत्त की टीम के साथ की गई संयुक्त जांच में एक ही बीट के भीतर 122 पेड़ों के ठूंठ बरामद हुए, जिससे बड़े पैमाने पर हुई इस तस्करी की पुष्टि हो गई।
सिस्टम पर सवाल: दफ्तर से महज 11 किमी की दूरी
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि माफियाओं ने पिछले तीन महीनों में मुख्य मार्ग से मात्र 50 मीटर अंदर घुसकर सुनियोजित तरीके से इन पेड़ों को काटा और लकड़ी को बाजार में खपा दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह घटनास्थल जिला वन अधिकारी (DFO) कार्यालय से मात्र 11 किलोमीटर की दूरी पर है।
मिलीभगत के आरोप और भ्रष्टाचार का साया
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण में वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक की मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई और परिवहन संभव नहीं है।
वर्तमान स्थिति:
वन विभाग फिलहाल अवैध कटाई से हुई राजस्व हानि का आकलन कर रहा है।
मरवाही वन मंडल पहले भी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के लिए विवादों में रहा है।
इतनी बड़ी घटना ने विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरती है या बड़े मगरमच्छों पर भी कार्रवाई होती है।

