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मिशन 2029 : नक्सल मोर्चे की जीत के बाद अब मणिपुर पर केंद्र की पैनी नजर

केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत को 2029 तक उग्रवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें मणिपुर अभियान का मुख्य केंद्र होगा। चुनाव और अमरनाथ यात्रा के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बलों को पूर्वोत्तर में तैनात किया जाएगा। CRPF CoBRA कमांडो जैसे विशेष बल गुरिल्ला ऑपरेशंस संभालेंगे, जबकि आधुनिक तकनीक और ड्रोन निगरानी का उपयोग बढ़ाया जाएगा। साथ ही, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जरिए ड्रग्स तस्करी पर कार्रवाई कर उग्रवाद की फंडिंग रोकने पर जोर दिया जाएगा।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 27 Apr 2026, 10:45 AM · अपडेट: 09 May 2026, 02:31 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर एक नई और निर्णायक रणनीति तैयार की है। वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) पर प्रभावी नियंत्रण पाने के बाद, अब सरकार का पूरा ध्यान पूर्वोत्तर राज्यों (Northeast) में सक्रिय उग्रवादी समूहों की कमर तोड़ने पर है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2029 तक पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को उग्रवाद मुक्त बनाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

मणिपुर बनेगा अभियान का केंद्र बिंदु

इस विशेष अभियान का आगाज मणिपुर से होने की प्रबल संभावना है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि पूर्वोत्तर में होने वाली हिंसक घटनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा मणिपुर का रहा है। क्षेत्र में शांति बहाली के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती में बड़े बदलावों की तैयारी पूरी कर ली गई है।

जैसे ही पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी संपन्न होगी, वहां से मुक्त होने वाले अतिरिक्त बलों को तुरंत पूर्वोत्तर के राज्यों—असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और विशेषकर मणिपुर—की ओर रवाना किया जाएगा।

कोबरा (CoBRA) कमांडो संभालेंगे मोर्चा

सरकार की योजना केवल जवानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि विशेषज्ञता (Specialization) का लाभ उठाना है। सूत्रों के मुताबिक:

  • नक्सल विरोधी अभियानों में माहिर CRPF की कोबरा (CoBRA) जैसी विशेष यूनिट्स को अब पूर्वोत्तर के जंगलों में तैनात किया जाएगा।

  • इन कमांडोज को गुरिल्ला युद्ध और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लड़ने का लंबा अनुभव है, जिसका फायदा उग्रवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने में मिलेगा।

  • नक्सल प्रभावित इलाकों से सुरक्षा बलों को पूरी तरह हटाया नहीं जाएगा, बल्कि एक रणनीतिक 'पुनर्संतुलन' (Rebalancing) किया जाएगा ताकि दोनों मोर्चों पर पकड़ मजबूत बनी रहे।

आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस होगी सुरक्षा

धरातल पर उग्रवाद से लड़ने के लिए सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया जा रहा है। उखरूल जैसे संवेदनशील जिलों में जातीय तनाव और सशस्त्र झड़पों को रोकने के लिए नई माइन-प्रोटेक्टेड गाड़ियाँ (MPV) और बुलेटप्रूफ जैकेटों की खेप पहुंचनी शुरू हो गई है। ड्रोन निगरानी और तकनीकी इंटेलिजेंस को भी इस बार पहले से अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।

उग्रवाद के 'फंडिंग सोर्स' पर कड़ा प्रहार

सरकार का मानना है कि उग्रवाद की जड़ें नशीले पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) से जुड़ी हैं।

"ड्रग्स के अवैध कारोबार से होने वाली कमाई ही इन संगठनों का मुख्य ईधन है।"

इसी को ध्यान में रखते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को भी इस मिशन में शामिल किया गया है। अब उग्रवाद विरोधी ऑपरेशंस और ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई एक साथ चलेगी।

बदलती तस्वीर: 2014 बनाम 2024

पिछले एक दशक में सुरक्षा स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

  • 2014 में पूर्वोत्तर में उग्रवाद की 824 घटनाएं हुई थीं।

  • 2024 तक यह संख्या सिमटकर मात्र 294 रह गई है।

हालांकि, मणिपुर में अभी भी चुनौतियां बरकरार हैं, जिसे खत्म करने के लिए केंद्र सरकार अब निर्णायक प्रहार की मुद्रा में है। 2029 का लक्ष्य यह सुनिश्चित करेगा कि पूर्वोत्तर विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ सके।

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