छत्तीसगढ़ में कुदरत का दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। प्रदेश के लोग जहाँ एक ओर सूरज की तपिश और झुलसाने वाली गर्म हवाओं (लू) से बेहाल थे, वहीं गुरुवार दोपहर बाद मौसम ने ऐसी पलटी मारी कि देखते ही देखते नजारा बदल गया। सुबह की चिलचिलाती धूप के बाद शाम होते-होते आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल लिया और कई जिलों में गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई।
झुलसाती गर्मी के बीच अचानक बरसी राहत
गुरुवार की शुरुआत हर दिन की तरह तेज धूप और उमस के साथ हुई थी, लेकिन दोपहर के बाद मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। गरियाबंद और लोरमी जैसे क्षेत्रों में दिनभर की भारी तपन के बाद शाम को तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई। हालांकि, जशपुर में इस मौसमी बदलाव ने मुश्किलें भी खड़ी कीं; यहाँ तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए, जिससे सड़क यातायात और बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही।
तापमान का गणित और राहत के आसार
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बदलाव का सीधा असर प्रदेश के पारे पर पड़ा है। वर्तमान में:
सबसे गर्म शहर: राजनांदगांव (44°C)
सबसे ठंडा क्षेत्र: जगदलपुर (25.3°C - न्यूनतम तापमान)
आगामी 48 घंटों में प्रदेश के औसत तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। इसके बाद अगले तीन दिनों तक तापमान स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है।
आगामी 5 दिनों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी
रायपुर मौसम केंद्र ने प्रदेश के सभी संभागों के लिए चेतावनी जारी की है। अगले 5 दिनों तक मौसम का मिजाज इसी तरह अनिश्चित बना रहेगा। विभाग के मुताबिक:
तेज हवाएं: 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की संभावना है।
बारिश और वज्रपात: प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। बिजली गिरने (गाज) की प्रबल आशंका है, इसलिए लोगों को खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे न रुकने की सलाह दी गई है।
सावधानी ही बचाव है: प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। अचानक आए इस बदलाव से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है। बदलते मौसम के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना अनिवार्य है, क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव मौसमी बीमारियों को न्योता दे सकता है।
