छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शादी की खुशियों के बीच कानूनी अड़चनों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां शादी की पूरी रस्मों के बाद दुल्हन ससुराल पहुंची, एक रात वहां भी रही, लेकिन अगले ही दिन महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम ने हस्तक्षेप करते हुए उसे वापस उसके मायके भेज दिया। मामला बाल विवाह से जुड़ा पाया गया है।
बारात धूमधाम से पहुंची, रस्में भी पूरी हुईं
जानकारी के अनुसार, बारात मंगलवार को बालोद से राजनांदगांव जिले के भर्रीटोला गांव पहुंची थी। दोनों परिवारों की मौजूदगी में पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ विवाह की सभी रस्में संपन्न कराई गईं। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात शादी की मुख्य रस्में पूरी हुईं और इसके बाद दुल्हन अपने नए घर यानी ससुराल पहुंच गई। यहां भी परंपरा के अनुसार स्वागत और रस्में की गईं। दुल्हन ने ससुराल में पहली रात भी बिताई।
सुबह पहुंची टीम, फिर बदल गया पूरा मामला
अगली सुबह अचानक महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान यह सामने आया कि यह मामला बाल विवाह से जुड़ा हुआ है। जांच में पाया गया कि दूल्हे की उम्र कानूनी रूप से तय सीमा यानी 21 वर्ष पूरी नहीं हुई है। विभाग के अनुसार, युवक की उम्र अभी लगभग 20 वर्ष 10 महीने है।
दस्तावेजों में उम्र को लेकर असमंजस
जांच के दौरान युवक के दस्तावेजों में भी विसंगति सामने आई। आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 13 जून 2002 दर्ज थी, जबकि स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि 13 जून 2005 पाई गई। नियमों के अनुसार विभाग ने स्कूल रिकॉर्ड को आधार मानते हुए निष्कर्ष निकाला कि युवक की कानूनी उम्र विवाह योग्य नहीं है। इसी आधार पर इस विवाह को शून्य (void marriage) घोषित कर दिया गया।
दुल्हन को मायके भेजा गया
निर्णय के बाद टीम ने दुल्हन को सुरक्षित उसके घर वापस भेज दिया। उसे वापस राजनांदगांव जिले के उसके मायके पहुंचाया गया। विभाग का कहना है कि कानून के अनुसार जब तक दोनों पक्ष विवाह योग्य आयु पूरी नहीं कर लेते, तब तक इस विवाह को मान्यता नहीं दी जा सकती।
दो महीने बाद फिर शादी की बात
परिवार के सदस्यों ने बताया कि युवक की उम्र पूरी होने में करीब दो महीने शेष हैं। उनका कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों की शादी दोबारा पूरे रीति-रिवाज के साथ की जाएगी। ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना मामलाइस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर शादी की तैयारियां और रस्में पूरी हो चुकी थीं, वहीं कानूनी हस्तक्षेप के बाद शादी को बीच में ही रोकना पड़ा।
प्रशासन की सख्ती का संदेश
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाल विवाह रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है, ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

