Saturday, 19 Sep 2026 भारत
ब्रेकिंग
National Career Service: महासमुंद कॉलेज में दी गई करियर सेवाओं की जानकारी, NCS पोर्टल से विद्यार्थियों को मिलेंगे रोजगार अवसर Surguja News: 20 लाख की मरम्मत के बाद फिर 55 लाख का टेंडर, पहाड़ी कोरवा आश्रम भवनों पर उठे सवाल Dewas News: जंगल में चल रहा था लाखों का जुआ, पुलिस ने मारी दबिश, 12 आरोपी गिरफ्तार, 12.86 लाख की सामग्री जब्त Damoh Murder Case: पिता ने पत्नी और तीन बच्चों की हत्या की, कुल्हाड़ी लेकर घर के बाहर बैठा मिला आरोपी Rajnandgaon Crime News: नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर ले गया था साथ Sakti School News: टीचर पर बैड टच का आरोप, परिजनों की शिकायत के बाद जांच के आदेश National Career Service: महासमुंद कॉलेज में दी गई करियर सेवाओं की जानकारी, NCS पोर्टल से विद्यार्थियों को मिलेंगे रोजगार अवसर Surguja News: 20 लाख की मरम्मत के बाद फिर 55 लाख का टेंडर, पहाड़ी कोरवा आश्रम भवनों पर उठे सवाल Dewas News: जंगल में चल रहा था लाखों का जुआ, पुलिस ने मारी दबिश, 12 आरोपी गिरफ्तार, 12.86 लाख की सामग्री जब्त Damoh Murder Case: पिता ने पत्नी और तीन बच्चों की हत्या की, कुल्हाड़ी लेकर घर के बाहर बैठा मिला आरोपी Rajnandgaon Crime News: नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर ले गया था साथ Sakti School News: टीचर पर बैड टच का आरोप, परिजनों की शिकायत के बाद जांच के आदेश
W 𝕏 f
होम छत्तीसगढ़ CG High Court का बड़ा फैसला : कर्मचारी की मौत पर …
बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट
बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ Featured

CG High Court का बड़ा फैसला : कर्मचारी की मौत पर मुआवजे में ‘सैलरी कैपिंग’ खत्म, अब वास्तविक वेतन बनेगा आधार

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद मिलने वाले मुआवजे की गणना अब किसी तय या काल्पनिक वेतन सीमा (कैपिंग) के आधार पर नहीं होगी, बल्कि मृतक की वास्तविक सैलरी को ही आधार माना जाएगा।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 07 May 2026, 05:30 PM · अपडेट: 02 Jun 2026, 02:27 PM
रायपुर/ बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मृतक कर्मचारियों के परिजनों के हित में एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद मिलने वाले मुआवजे की गणना अब किसी पुरानी या काल्पनिक वेतन सीमा के आधार पर नहीं की जा सकती। मुआवजा तय करने का एकमात्र आधार कर्मचारी की मृत्यु के समय की वास्तविक (Actual) सैलरी होगी।

इस फैसले को उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें अब तक तकनीकी नियमों और वेतन सीमा की वजह से कम मुआवजा मिलता रहा था।

क्या है पूरा मामला

यह मामला जगदलपुर निवासी ट्रक ड्राइवर सत्येंद्र सिंह से जुड़ा है, जिनकी 15 दिसंबर 2017 को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद पत्नी, बच्चे और मां ने मुआवजे की मांग करते हुए लेबर कोर्ट में दावा दायर किया था।

लेबर कोर्ट ने सुनवाई के बाद ड्राइवर की मासिक आय 9,880 रुपये मानते हुए करीब 9.49 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।

लेकिन इसके बाद बीमा कंपनी ने इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम वेतन 8,000 रुपये ही माना जाना चाहिए। इसी आधार पर कम मुआवजे की मांग की गई थी।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए Chhattisgarh High Court की सिंगल जज बेंच (न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु) ने स्पष्ट टिप्पणी की कि मुआवजे की गणना किसी पुराने, अवास्तविक या तय सीमा वाले वेतन के आधार पर नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने कहा—

“कर्मचारी की मृत्यु के समय जो वास्तविक वेतन था, वही मुआवजे का आधार होना चाहिए। काल्पनिक या सीमित वेतन तय करके परिवार को नुकसान पहुंचाना न्यायसंगत नहीं है।”

कैपिंग सिस्टम पर बड़ा प्रहार

अब तक कई मामलों में बीमा कंपनियां और संबंधित संस्थाएं मुआवजे की गणना के लिए पुरानी “सैलरी कैपिंग” प्रणाली का सहारा लेती थीं, जिसमें अधिकतम वेतन सीमा तय कर दी जाती थी। इससे वास्तविक आय ज्यादा होने के बावजूद मुआवजा कम मिल जाता था।

हाई कोर्ट ने इस पूरी व्यवस्था को गलत ठहराते हुए संकेत दिया कि अब ऐसे किसी भी प्रतिबंधित फॉर्मूले का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं होगा।

परिवारों को बड़ी राहत

इस फैसले के बाद अब उन मामलों में बड़ा बदलाव आने की संभावना है, जहां मृतक कर्मचारी की वास्तविक आय अधिक होने के बावजूद सीमित वेतन के आधार पर मुआवजा तय किया गया था।

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • अब मुआवजा गणना में वास्तविक सैलरी को प्राथमिकता मिलेगी
  • बीमा कंपनियों की अपीलों पर असर पड़ेगा
  • लंबित मामलों में पुनर्विचार की गुंजाइश बढ़ेगी
  • मृतक आश्रित परिवारों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी

क्यों माना जा रहा है यह फैसला अहम?

यह निर्णय सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मुआवजा ढांचे पर असर डाल सकता है। खासकर उन परिवारों के लिए यह राहत की खबर है, जिनका जीवन किसी दुर्घटना के बाद आर्थिक संकट में चला गया था।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह रुख “न्यायिक संवेदनशीलता” को दर्शाता है, जिसमें तकनीकी नियमों से ऊपर मानव जीवन और परिवार की वास्तविक जरूरतों को रखा गया है।

आगे क्या होगा असर?

इस फैसले के बाद बीमा कंपनियों और निचली अदालतों के लिए भी यह दिशा-निर्देश जैसा साबित हो सकता है। अब मुआवजा तय करते समय:

  • वास्तविक आय प्रमाणित करना जरूरी होगा
  • कैपिंग आधारित तर्क कमजोर होंगे
  • परिवारों के हितों को प्राथमिकता मिलेगी
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश
विदेश
सरकारी सूचना
राजनीति
खेल
मनोरंजन
कारोबार
कीर्तिमान विशेष
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें