प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार तड़के छत्तीसगढ़ के दो बड़े शहरों, दुर्ग और बिलासपुर में एक साथ दबिश देकर हड़कंप मचा दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों से जुड़े सुरागों के आधार पर की जा रही है। जांच की आंच इस बार सत्ता के गलियारों से लेकर सर्राफा बाजार तक पहुँच गई है।
दुर्ग: भाजपा नेता और बिल्डर चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर घेराबंदी
दुर्ग जिले में ED की टीम ने 'अमर इंफ्रा' के संचालक और भाजपा नेता चतुर्भुज राठी को निशाने पर लिया है। सुबह लगभग 6 बजे, जब शहर पूरी तरह जागा भी नहीं था, ED के अधिकारी चार वाहनों में सवार होकर पुलगांव स्थित महेश कॉलोनी पहुँचे।
संयुक्त कार्रवाई: अधिकारियों ने राठी के निवास और उनके कार्यालय पर एक साथ छापा मारा।
दस्तावेजों की जांच: सूत्रों के अनुसार, टीम राठी की आधा दर्जन से अधिक फर्मों के वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों और रियल एस्टेट निवेश के रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: अचानक हुई इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि जांच में कोई बाधा न आए। जांच का मुख्य केंद्र संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और टैक्स चोरी से जुड़े मामले बताए जा रहे हैं।
बिलासपुर: शराब घोटाले की आंच में झुलसा सर्राफा कारोबार
वहीं दूसरी ओर, बिलासपुर के सदर बाजार स्थित प्रसिद्ध 'श्री राम ज्वेलर्स' के मालिक विवेक अग्रवाल के घर और प्रतिष्ठान पर ED के 10 से ज्यादा अधिकारियों ने धावा बोला। बिलासपुर में हुई इस कार्रवाई को प्रदेश के चर्चित 'शराब घोटाले' से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्यों हुई कार्रवाई? खबरों के मुताबिक, विवेक अग्रवाल के भाई विकास अग्रवाल के तार शराब घोटाले से जुड़े होने की आशंका है। विकास अग्रवाल फिलहाल फरार बताया जा रहा है और वह शराब सिंडिकेट के मुख्य चेहरे अनवर ढेबर का करीबी माना जाता है। इसी कड़ी को जोड़ने के लिए ED विवेक अग्रवाल के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही है।
क्या है जांच का मुख्य उद्देश्य?
इन छापों के पीछे ED का मुख्य उद्देश्य अवैध धन के प्रवाह (Money Laundering) का पता लगाना है। दुर्ग में जहाँ बिल्डर के निवेश और भाजपा नेता की सक्रियता जांच के दायरे में है, वहीं बिलासपुर में शराब घोटाले के जरिए कमाई गई काली कमाई को खपाने के सुराग ढूंढे जा रहे हैं।
फिलहाल, दोनों ही शहरों में ED की कार्रवाई जारी है। अधिकारियों ने अभी तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक जब्ती या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज़ ज़ब्त किए जाने की खबर है। छत्तीसगढ़ की राजनीति और व्यापारिक जगत में इस कार्रवाई के बाद से भारी खलबली मची हुई है।
