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बड़े पैमाने पर अवैध कटाई
बड़े पैमाने पर अवैध कटाई
छत्तीसगढ़

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 106 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा, सैटेलाइट व ड्रोन से बड़े पैमाने पर जंगल कटाई का खुलासा

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में सैटेलाइट और ड्रोन जांच से पता चला है कि पिछले 15 वर्षों में करीब 106 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा हुआ और 1 लाख से अधिक पेड़ काटे गए। खेती के नाम पर जंगल साफ किया गया, जिससे वन्यजीवों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हुआ है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
25 Apr 2026, 04:30 PM
रायपुर

रायपुर: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बीते डेढ़ दशक से चल रहे बड़े पैमाने पर अवैध जंगल कटाई के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। ISRO के कार्टोसैट सैटेलाइट और हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन सर्वे के जरिए सामने आई तस्वीरों ने इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई उजागर कर दी है। जांच में पाया गया कि करीब 106 हेक्टेयर कोर वन क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया गया और इस दौरान 1 लाख से अधिक पेड़ों को काट दिया गया।

डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के नेतृत्व में की गई जांच में साल 2008, 2010, 2012 और 2022 के सैटेलाइट डेटा की तुलना की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में जहां अतिक्रमण का दायरा 45 हेक्टेयर तक सीमित था, वहीं 2022 तक यह बढ़कर 106 हेक्टेयर हो गया। यह वृद्धि न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि जंगलों के सुनियोजित विनाश की कहानी भी बयां करती है। एक समय में जहां प्रति हेक्टेयर लगभग 1000 पेड़ मौजूद थे, अब वही संख्या घटकर मात्र 25 से 50 रह गई है।

साल के पेड़ों को काटा

जांच में यह भी सामने आया कि भू-माफियाओं ने खेती के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर साल के पेड़ों को काटा और सबूत मिटाने के लिए उनके ठूंठ तक जला दिए। सैटेलाइट इमेजरी की सटीकता इतनी अधिक थी कि जमीन पर मौजूद पेड़ों के अवशेष और खेतों की सीमाएं तक स्पष्ट दिखाई दीं। रिपोर्ट के अनुसार, जैतपुरी गांव के 166 अतिक्रमणकारियों ने सीतानदी रेंज की वन भूमि पर कब्जा कर रखा है, जबकि उनके पास पहले से ही राजस्व क्षेत्र में जमीन उपलब्ध है।

गंभीर खतरा

इस पूरे मामले ने पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर खतरा खड़ा कर दिया है। सीतानदी क्षेत्र महानदी के कैचमेंट का अहम हिस्सा है और यह हाथियों, तेंदुओं और बाघों जैसे वन्यजीवों का प्रमुख आवास भी है। बड़े पैमाने पर हुई कटाई से न केवल वन्यजीवों का प्राकृतिक घर उजड़ा है, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है। यह खुलासा प्रशासन और वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

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