Saturday, 19 Sep 2026 भारत
ब्रेकिंग
Sasaram Murder Case: खौफनाक अंत, जादू-टोने के शक में बुजुर्ग की हत्या, जंगल में मिला खून से लथपथ शव, जांच में जुटी पुलिस National Career Service: महासमुंद कॉलेज में दी गई करियर सेवाओं की जानकारी, NCS पोर्टल से विद्यार्थियों को मिलेंगे रोजगार अवसर Surguja News: 20 लाख की मरम्मत के बाद फिर 55 लाख का टेंडर, पहाड़ी कोरवा आश्रम भवनों पर उठे सवाल Dewas News: जंगल में चल रहा था लाखों का जुआ, पुलिस ने मारी दबिश, 12 आरोपी गिरफ्तार, 12.86 लाख की सामग्री जब्त Damoh Murder Case: पिता ने पत्नी और तीन बच्चों की हत्या की, कुल्हाड़ी लेकर घर के बाहर बैठा मिला आरोपी Rajnandgaon Crime News: नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर ले गया था साथ Sasaram Murder Case: खौफनाक अंत, जादू-टोने के शक में बुजुर्ग की हत्या, जंगल में मिला खून से लथपथ शव, जांच में जुटी पुलिस National Career Service: महासमुंद कॉलेज में दी गई करियर सेवाओं की जानकारी, NCS पोर्टल से विद्यार्थियों को मिलेंगे रोजगार अवसर Surguja News: 20 लाख की मरम्मत के बाद फिर 55 लाख का टेंडर, पहाड़ी कोरवा आश्रम भवनों पर उठे सवाल Dewas News: जंगल में चल रहा था लाखों का जुआ, पुलिस ने मारी दबिश, 12 आरोपी गिरफ्तार, 12.86 लाख की सामग्री जब्त Damoh Murder Case: पिता ने पत्नी और तीन बच्चों की हत्या की, कुल्हाड़ी लेकर घर के बाहर बैठा मिला आरोपी Rajnandgaon Crime News: नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर ले गया था साथ
W 𝕏 f
होम विदेश क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिल पाएगा नोबेल शांति पुरस्…
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
विदेश

क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिल पाएगा नोबेल शांति पुरस्कार? अचानक क्यों तेज हुई चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को Nobel Peace Prize मिलने की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। उनके समर्थक मध्य पूर्व में शांति प्रयासों और कूटनीतिक पहल को आधार बनाकर उन्हें दावेदार मान रहे हैं, जबकि आलोचक अमेरिका-ईरान तनाव और अन्य नीतियों को लेकर उनकी छवि पर सवाल उठा रहे हैं।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 03 May 2026, 11:23 AM · अपडेट: 20 May 2026, 04:51 AM
वॉशिंगटन
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे तनाव, युद्ध और कूटनीतिक टकराव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में हैं। चर्चा इस बात को लेकर तेज हो गई है कि क्या उन्हें इस बार Nobel Peace Prize मिल सकता है या यह सिर्फ राजनीतिक कयासों तक ही सीमित रहेगा। नोबेल कमेटी के अनुसार इस वर्ष सैकड़ों नामांकन प्राप्त हुए हैं, जिनमें विभिन्न देशों के नेता, शांति कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। हालांकि समिति की ओर से किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, क्योंकि पूरी नामांकन प्रक्रिया गोपनीय रखी जाती है।

अचानक क्यों बढ़ी ट्रंप के नोबेल की चर्चा?

ट्रंप का नाम एक बार फिर सुर्खियों में आने की मुख्य वजह उनके कुछ कूटनीतिक दावे और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता से जुड़े बयान बताए जा रहे हैं। खासकर मध्य पूर्व में तनाव कम करने और संघर्ष विराम की कोशिशों को लेकर उनके समर्थक उन्हें “डील मेकर” के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, यह भी सच है कि उनके कार्यकाल और नीतियों को लेकर वैश्विक स्तर पर मतभेद गहरे रहे हैं। यही वजह है कि उनकी नोबेल दावेदारी को लेकर राय बंटी हुई है।

नामांकन प्रक्रिया में क्या है स्थिति?

नोबेल समिति के नियमों के अनुसार हर साल कई सौ नामांकन आते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी सूची सार्वजनिक नहीं की जाती। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वर्ष भी 200 से अधिक व्यक्तियों और संगठनों को नामांकित किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि यह स्पष्ट है कि नामांकन का मतलब चयन नहीं होता। अंतिम फैसला केवल समिति द्वारा किए गए मूल्यांकन के आधार पर ही लिया जाता है।

ट्रंप के दावों के पीछे क्या तर्क दिए जा रहे हैं?

ट्रंप समर्थक मानते हैं कि उनके नेतृत्व में कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संघर्ष विराम प्रयासों ने दुनिया के कई हिस्सों में तनाव को कम करने में भूमिका निभाई। विशेष रूप से मध्य पूर्व और कुछ अन्य क्षेत्रों में उनकी कूटनीतिक पहल को आधार बनाकर उन्हें शांति दूत के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि उनके कई फैसलों और नीतियों ने वैश्विक तनाव को और बढ़ाया है, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच संबंधों को लेकर।

ईरान-अमेरिका तनाव बना बड़ी चुनौती

विश्लेषकों के मुताबिक सबसे बड़ा मुद्दा अभी भी अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव है। परमाणु समझौते को लेकर बातचीत कई बार ठप पड़ चुकी है और सैन्य गतिविधियों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। यही कारण है कि ट्रंप की “शांति समर्थक” छवि को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोबेल शांति पुरस्कार के लिए केवल राजनीतिक प्रयास नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और स्थिर शांति स्थापित करने के ठोस परिणाम भी जरूरी होते हैं।

दुनिया दो हिस्सों में बंटी

ट्रंप को लेकर वैश्विक राय स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बंटी हुई है। एक पक्ष उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखता है जो कठिन परिस्थितियों में भी “डील” कर समाधान निकालने की क्षमता रखते हैं। वहीं दूसरा पक्ष उनके कार्यकाल को टकराव और अस्थिरता बढ़ाने वाला मानता है। यह विभाजन ही उनकी नोबेल दावेदारी को और विवादास्पद बना देता है।

नोबेल कमेटी का रुख साफ

नोबेल कमेटी पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय होती है और किसी भी नाम पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की जाती। अंतिम चयन केवल उपलब्ध रिकॉर्ड, शांति प्रयासों के प्रभाव और वैश्विक परिणामों के आधार पर किया जाता है।

अक्टूबर 2026 पर टिकी नजरें

अब पूरी दुनिया की नजरें अक्टूबर 2026 पर टिकी हैं, जब शांति पुरस्कार के विजेता की घोषणा की जाएगी। तब तक डोनाल्ड ट्रंप का नाम सिर्फ चर्चाओं और अटकलों में ही रहेगा। हालांकि इतना तय माना जा रहा है कि उनके नाम को लेकर शुरू हुई यह बहस सिर्फ एक पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, कूटनीति और शांति की परिभाषा पर भी नई चर्चा खड़ी कर रही है।

क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश
विदेश
सरकारी सूचना
राजनीति
खेल
मनोरंजन
कारोबार
कीर्तिमान विशेष
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें