अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव पर एक बार फिर बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ईरान द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए नए प्रस्ताव पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने असंतोष जताया है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच “शत्रुता समाप्त” हो चुकी है।
ट्रंप ने
अमेरिकी संसद को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के
बाद से अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच कोई सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं हुई है। उनके
अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुआ टकराव अब थम चुका है, इसलिए आगे सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, ट्रंप का यह बयान उनके ही कुछ घंटे
पहले दिए गए उस रुख से अलग नजर आता है, जिसमें उन्होंने कहा
था कि अमेरिका ईरान के मुद्दे पर “जल्दी पीछे नहीं हटेगा”। यह विरोधाभास वॉशिंगटन
की रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री Abbas
Araghchi ने दावा किया है कि इस संघर्ष में अमेरिका को लगभग 100
अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। जबकि Pentagon के
अधिकारियों ने अमेरिकी कांग्रेस में यह आंकड़ा करीब 25 अरब
डॉलर बताया।
करीब पांच
हफ्ते तक चले इस संघर्ष के दौरान दो सप्ताह का युद्धविराम भी लागू रहा, जिसे 22 अप्रैल
के बाद बढ़ाया गया था। हालांकि, स्थायी समाधान की दिशा में
अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
इस पूरे घटनाक्रम में Pakistan ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है। पहले दौर की बातचीत नाकाम रहने के बाद दूसरे दौर के लिए न तो ईरान और न ही अमेरिका ने अपने प्रतिनिधि भेजे, जिससे कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठंडे पड़ते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, ज़मीनी स्तर पर शांति के संकेत जरूर हैं, लेकिन राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है।
