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पूर्व नक्सली ट्रैक्टर प्रशिक्षण लेते हुए पुनर्वास केंद्र में
पूर्व नक्सली ट्रैक्टर प्रशिक्षण लेते हुए पुनर्वास केंद्र में
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खौफ से उम्मीद तक : वोटर आईडी से ट्रैक्टर ट्रेनिंग तक बदल रही पूर्व नक्सलियों की जिंदगी

नारायणपुर के लाइवलीहुड कॉलेज पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित नक्सलियों को नई जिंदगी देने की पहल सफल होती दिख रही है। प्रशासन ने उन्हें वोटर आईडी, ऑनलाइन पंजीयन और मतदाता प्रक्रिया से जोड़कर लोकतांत्रिक मुख्यधारा में शामिल किया है। वहीं, उनकी मांग पर ट्रैक्टर चलाने और मरम्मत का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। यह केंद्र अब बदलाव, विश्वास और नई शुरुआत की प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
19 May 2026, 11:15 AM
📍 रायपुर

नारायणपुर जिले का लाइवलीहुड कॉलेज (पुनर्वास केंद्र) आज उन लोगों के जीवन में नई रोशनी ला रहा है, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था। जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल और पुनर्वास योजनाओं के जरिए आत्मसमर्पित नक्सली अब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। 

पुनर्वासित लोगों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकारी सेवाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में 8 लोगों को नए वोटर आईडी कार्ड वितरित किए गए हैं, जबकि 25 लोगों का ऑनलाइन पंजीयन पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 40 लोगों से फॉर्म-6 भरवाकर उन्हें मतदाता प्रक्रिया से जोड़ा गया है, ताकि वे लोकतंत्र के महापर्व में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

“अब ट्रैक्टर चलाना सीखना है”

हाल ही में कलेक्टर ने पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां रह रहे 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने ट्रैक्टर चलाने और उसकी मरम्मत का प्रशिक्षण लेने की इच्छा जताई। खास बात यह रही कि इनमें से कई लोगों ने जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी। कलेक्टर ने उनकी इच्छा और आत्मनिर्भर बनने के जज्बे को देखते हुए तुरंत पहल की और सोमवार से लाइवलीहुड कॉलेज में ट्रैक्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करा दिया गया।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

अब पुनर्वास केंद्र में रह रहे लोग नियमित रूप से ट्रैक्टर ड्राइविंग, तकनीकी जानकारी और रिपेयरिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में रोजगार और स्थायी आजीविका का मजबूत माध्यम भी बन रहा है।

डर से विश्वास तक का सफर

नारायणपुर के इस पुनर्वास केंद्र में अब बदलाव साफ दिखाई देता है। जिन चेहरों पर कभी भय और अस्थिरता नजर आती थी, वहां अब आत्मविश्वास, उम्मीद और बेहतर भविष्य की चमक दिखाई दे रही है। शासन की योजनाओं से जुड़कर ये लोग अब सामान्य नागरिक की तरह समाज और देश के विकास में भागीदारी निभाने के लिए तैयार हैं। आज यह पुनर्वास केंद्र केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि विश्वास, बदलाव और नई शुरुआत की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।
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