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जंगली बिल्ली के काटने से महिला की मौत, झाड़-फूंक में उलझे रहे परिजन; अस्पताल पहुंचने तक फैल चुका था रेबीज

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पनगवां गांव में जंगली बिल्ली के काटने से घायल 65 वर्षीय महिला की रेबीज से मौत हो गई। परिजन समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और झोलाछाप डॉक्टर के भरोसे रहे, जिससे इलाज में देरी हुई। जब हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक वायरस शरीर में फैल चुका था और इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
19 Apr 2026, 06:47 PM
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के जलके पंचायत के पनगवां गांव में अंधविश्वास और इलाज में देरी एक महिला की जान पर भारी पड़ गई। जंगली बिल्ली के काटने से घायल 65 वर्षीय मातिन कुंवर की रेबीज संक्रमण से मौत हो गई। परिजन समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और झोलाछाप डॉक्टर के भरोसे रहे, जिससे वायरस शरीर में फैलता चला गया

जानकारी के मुताबिक, करीब 20-25 दिन पहले मातिन कुंवर पास के जंगल में गई थीं, जहां एक उग्र जंगली बिल्ली ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके बाएं पैर पर गहरे घाव हो गए थे। परिजनों को गंभीरता का अंदाजा नहीं था, इसलिए वे उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के एक कथित बाबा के पास झाड़-फूंक कराने ले गए। इस दौरान लगातार देरी होती रही और महिला की हालत बिगड़ती गई। परिवार की बहू शकुंतला ने बताया कि कुछ दिनों बाद महिला में अजीब लक्षण दिखने लगे। बारिश, बिजली की चमक और पानी के संपर्क में आने से वे घबराने लगी थीं। डॉक्टरों के अनुसार, ये रेबीज के स्पष्ट लक्षण होते हैं, जिनमें मरीज को पानी और तेज रोशनी से डर लगने लगता है।

अस्पताल पहुंचे तो बहुत देर हो चुकी थी
हालत ज्यादा बिगड़ने पर 15 अप्रैल को परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने एंटी-रेबीज वैक्सीन की पहली डोज दी, लेकिन तब तक संक्रमण शरीर में फैल चुका था। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें भर्ती किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
डॉक्टरों ने दी चेतावनी
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में रेबीज से मौत की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि किसी भी जानवर के काटने के तुरंत बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। थोड़ी सी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
अंधविश्वास बना मौत की वजह
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और झोलाछाप इलाज के खतरों को उजागर किया है। यदि समय रहते सही चिकित्सा मिलती, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
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