ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को सीधी और कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की कथित घेराबंदी समाप्त नहीं की, तो ओमान सागर अमेरिकी सेना के लिए “कब्रिस्तान” बन सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो पूरा पश्चिम एशिया एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।
पूर्व IRGC कमांडर ने दी खुली धमकी
यह बयान ईरान की एक्सपीडिएंसी काउंसिल के सदस्य और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहसेन रेजाई ने ईरानी सरकारी टेलीविजन पर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई ईरान के खिलाफ खुली सैन्य आक्रामकता है और तेहरान इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। मोहसेन रेजाई ने कहा, “हम अमेरिकी सेना को सलाह देते हैं कि वह इस घेराबंदी को खत्म कर दे, इससे पहले कि ओमान सागर उसकी कब्रगाह बन जाए।” उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना किसी भी संभावित युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और यदि जरूरत पड़ी तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
घेराबंदी युद्ध का कृत्य
रेजाई ने अमेरिकी कार्रवाई को “युद्ध का कृत्य” करार देते हुए कहा कि ईरान को अपनी समुद्री सीमाओं और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उनके अनुसार अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की निगरानी और घेराबंदी क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा है। ईरान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर तेहरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों की रक्षा के लिए जरूरी है।
परमाणु मुद्दे पर बढ़ा टकराव
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि तेहरान इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण ऊर्जा उद्देश्यों के लिए है। तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को बातचीत की मेज पर लौटने के लिए पांच बड़ी शर्तें भेजी हैं। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों पर नियंत्रण लगाए।
अमेरिका की 5 बड़ी शर्तें
अमेरिका द्वारा रखी गई प्रमुख शर्तों में शामिल हैं:
- संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपना
- केवल एक परमाणु केंद्र को चालू रखना
- युद्ध हर्जाने की मांग छोड़ना
- क्षेत्रीय संघर्षों और युद्ध को समाप्त करना
- जब्त ईरानी संपत्तियों को फिलहाल ब्लॉक रखना
अमेरिका का कहना है कि यदि ईरान इन शर्तों को मानता है, तभी आगे कूटनीतिक बातचीत और प्रतिबंधों में राहत पर विचार किया जा सकता है।
ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें
अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में ईरान ने भी अपनी पांच शर्तें रख दी हैं। तेहरान ने साफ कर दिया है कि बिना प्रतिबंध हटाए और क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाइयों को रोके किसी भी समझौते की संभावना बेहद कम है।
ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं
- लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में सैन्य अभियानों की समाप्ति
- ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाना
- जब्त ईरानी संपत्तियों को जारी करना
- युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना
ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले विश्वास बहाली के कदम उठाने होंगे, तभी कोई नई परमाणु या सुरक्षा वार्ता आगे बढ़ सकती है।
ओमान सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य
ओमान सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिने जाते हैं। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल सप्लाई इसी रास्ते से होती है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग के जरिए एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में सैन्य टकराव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ सकता है बड़ा संकट
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है। लेबनान, सीरिया, इराक और यमन जैसे देशों में पहले से ही कई क्षेत्रीय संघर्ष चल रहे हैं, जहां ईरान समर्थित समूह सक्रिय हैं। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। इससे वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
दुनिया की नजरें अब कूटनीतिक समाधान पर
हालांकि दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भी उम्मीद कर रहा है कि मामला कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकेगा। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संकट पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकता है और दुनिया को एक नए बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष की ओर धकेल सकता है।

