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निगम प्रशासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन
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भिलाई नगर निगम में वेतन संकट गहराया: मार्च की सैलरी अटकी, कर्मचारियों और विपक्ष का प्रदर्शन तेज

भिलाई नगर निगम में वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। लगभग 350 नियमित कर्मचारियों को मार्च माह का वेतन अप्रैल की 15 तारीख तक भी नहीं मिला, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी और आर्थिक परेशानी बढ़ गई है। निगम प्रशासन जहां भारी टैक्स वसूली का दावा कर रहा है, वहीं वेतन भुगतान में देरी पर सवाल उठ रहे हैं। इसी मुद्दे पर भाजपा पार्षदों और नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ और प्रशासन पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। विपक्ष का कहना है कि एक एजेंसी को करोड़ों का भुगतान किया गया, जबकि कर्मचारियों के वेतन को प्राथमिकता नहीं दी गई।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
15 Apr 2026, 04:49 PM
📍 भिलाई
भिलाई नगर निगम में वित्तीय प्रबंधन और वेतन भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर निगम प्रशासन पिछले एक वर्ष में लगभग 104 करोड़ रुपये टैक्स वसूली का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपने नियमित कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पाने से नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, भिलाई नगर निगम में करीब 350 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनका कुल मासिक वेतन लगभग 3 करोड़ रुपये के आसपास बताया जाता है। सामान्य रूप से इन कर्मचारियों को हर महीने की 1 से 3 तारीख के बीच वेतन मिल जाना चाहिए, लेकिन इस बार स्थिति अलग रही। अप्रैल की 15 तारीख बीत जाने के बावजूद कर्मचारियों को मार्च माह का वेतन नहीं मिला, जिससे उनके सामने आर्थिक कठिनाइयाँ खड़ी हो गई हैं।
कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन 
कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने घर के जरूरी खर्च, बच्चों की स्कूल फीस, ईएमआई और अन्य वित्तीय दायित्व समय पर पूरा नहीं कर पा रहे हैं। लगातार हो रही देरी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और वे प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। निगम में नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने निगम कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निगम प्रशासन वेतन भुगतान को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है और कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है।
जांच की मांग 
भोजराज सिंह ने आरोप लगाया कि कमिश्नर से 48 घंटे के भीतर वेतन जारी करने की मांग की गई थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी अवधि में एक अर्बन एजेंसी को लगभग 8 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि कर्मचारियों के वेतन को प्राथमिकता नहीं दी गई। इस स्थिति को उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा बताते हुए जांच की मांग की है।
फिलहाल निगम प्रशासन की ओर से वेतन भुगतान में देरी के कारणों पर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारी और जनप्रतिनिधि दोनों ही जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि स्थिति सामान्य हो सके और कर्मचारियों को राहत मिल सके।
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