मई महीने की शुरुआत आम आदमी की जेब पर भारी पड़ती नजर आ रही है। 1 मई को तेल कंपनियों द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में की गई बढ़ोतरी ने बाजार में खलबली मचा दी है। इस फैसले के साथ ही 5 किलोग्राम वाला 'छोटू' सिलेंडर भी महंगा हो गया है। लेकिन असली चिंता गैस सिलेंडर नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की संभावित कीमतों को लेकर है, जो आने वाले दिनों में आम जनता का बजट बिगाड़ सकती हैं।
कच्चे तेल का संकट और वैश्विक दबाव
गैस की कीमतों में इजाफे के बाद अब हर तरफ एक ही चर्चा है—क्या पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ेंगे? हालांकि, तेल कंपनियों ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
विशेष रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने और वहां जारी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतें $125$ डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई थीं। वर्तमान में भी यह $115$ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा
सरकारी सूत्रों के हवाले से संकेत दिए हैं कि भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की प्रबल संभावना है। गौर करने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें आसमान छूने के बावजूद घरेलू स्तर पर लंबे समय से पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां इस समय भारी वित्तीय बोझ तले दबी हैं। आंकड़ों के मुताबिक:
- पेट्रोल पर कंपनियों को करीब 20 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
- डीजल पर यह घाटा और भी गंभीर है, जो करीब 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है।
क्या होगा आम आदमी पर असर?
अगर तेल कंपनियां अपने इस घाटे की भरपाई करने का फैसला लेती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक और बड़ी वृद्धि देखी जा सकती है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है, जिससे फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।
फिलहाल, गेंद सरकारी तेल कंपनियों के पाले में है। अब देखना यह होगा कि सरकार और तेल कंपनियां आम चुनाव और आर्थिक संतुलन के बीच तालमेल बिठाते हुए क्या कदम उठाती हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आई, तो आम जनता को महंगाई की एक और बड़ी लहर का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
