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AI फोटो
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लाड़ली बहना योजना: नकद सहायता से आगे बढ़कर अब पशुपालन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी

लाड़ली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार महिलाओं को हर महीने ₹1500 की आर्थिक सहायता दे रही है, जिससे करीब 1.25 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। अब सरकार इस योजना को आगे बढ़ाते हुए कृषि से जुड़ी महिलाओं को पशुपालन (गाय-भैंस) के लिए आर्थिक मदद देने की तैयारी कर रही है, ताकि वे दूध उत्पादन के जरिए स्थायी आय कमा सकें। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ सहायता राशि तक सीमित न रखकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि विपक्ष इस राशि को बढ़ाकर ₹3000 करने की मांग कर रहा है, जिस पर सरकार भविष्य में विचार करने की बात कह रही है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
18 Apr 2026, 05:01 PM
📍 मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। लाड़ली बहना योजना के तहत पहले से मिल रही मासिक आर्थिक सहायता के साथ अब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

राज्य सरकार वर्तमान में इस योजना के माध्यम से लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर रही है। इस पर सरकार को हर महीने करीब 1836 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की दैनिक जरूरतों को पूरा करना और उन्हें आर्थिक रूप से कुछ हद तक स्वतंत्र बनाना है।

अब सरकार इसी योजना को एक कदम आगे बढ़ाते हुए खेती-किसानी से जुड़ी महिलाओं को पशुधन उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इसके तहत पात्र महिलाओं को गाय और भैंस जैसे पशु पालने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे वे दूध उत्पादन जैसे कार्यों के जरिए नियमित आय अर्जित कर सकेंगी।

खेती से जुड़ी महिलाओं को मिलेगा सीधा लाभ

यह नई पहल खासतौर पर उन महिलाओं के लिए होगी जो कृषि या उससे जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। सरकार का मानना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे महिलाओं को घर बैठे रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि यह सुविधा सभी लाभार्थियों के लिए अनिवार्य नहीं होगी, बल्कि इच्छुक और पात्र महिलाओं को ही इसका लाभ दिया जाएगा।

अब तक का खर्च और सरकार का लक्ष्य

सरकार लाड़ली बहना स्कीम के तहत अब तक करीब 55 हजार करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में ट्रांसफर कर चुकी है। इसके अलावा ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश जारी है।

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य महिलाओं को केवल सहायता राशि तक सीमित न रखकर उन्हें आय के स्थायी स्रोत उपलब्ध कराना है, ताकि वे खुद कमाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकें।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की योजना

जहां एक ओर सरकार इस योजना को महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार इस पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष की मांग है कि महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की सहायता दी जाए।
इस पर सरकार का कहना है कि भविष्य में योजना की राशि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है और लक्ष्य इसे धीरे-धीरे 3000 रुपये तक पहुंचाना है।

राजनीति और आर्थिक दबाव

  • विपक्ष का ₹3000 मासिक देने का प्रस्ताव सीधे वेलफेयर बनाम फिस्कल बोझ की बहस है
  • सरकार पहले से ही हर महीने ~₹1836 करोड़ खर्च कर रही है
  • राशि बढ़ाना संभव है, लेकिन धीरे-धीरे ही किया जाएगा

क्या बदल रहा है?

अब तक इस योजना का फोकस सीधा नकद ट्रांसफर (₹1500 प्रति माह) था, जिससे महिलाओं की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हों। लेकिन अब सरकार इसे एक आय-उत्पन्न (income-generating) मॉडल में बदलने की कोशिश कर रही है, खासकर:

  • पशुपालन (गाय, भैंस देना)
  • दूध उत्पादन से नियमित कमाई
  • ग्रामीण महिलाओं के लिए घर-आधारित रोजगार

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