वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बादलों ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक समय बीएसई (BSE) सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूट गया था, लेकिन बाजार बंद होने तक इसने कुछ रिकवरी की और अंततः 252 अंकों (0.33%) की गिरावट के साथ 77,017.79 के स्तर पर थमा।
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी50 भी दबाव झेल नहीं पाया और 86.50 अंकों (0.36%) की फिसलन के साथ 24,032.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे चला गया था, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी।
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट
शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार से भी बुरी खबर आई। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी फंडों की निकासी के चलते भारतीय रुपया 0.2% टूटकर 95.28 के रिकॉर्ड निचले स्तर (All-time Low) पर बंद हुआ।
दिग्गज शेयरों की स्थिति: कौन गिरा, कौन संभला?
सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 20 लाल निशान में बंद हुए।
सबसे ज्यादा गिरावट: आईसीआईसीआई बैंक (1.54%) में दर्ज की गई। इसके अलावा टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, मारुति, एसबीआई, और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों में भी बिकवाली रही।
मजबूती: विपरीत परिस्थितियों के बावजूद महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, और रिलायंस जैसे शेयरों ने बाजार को थामने की कोशिश की।
सेक्टर का हाल: जहाँ बैंकिंग, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में गिरावट रही, वहीं ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में मामूली बढ़त देखी गई। ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.17% और 0.28% की तेजी के साथ बंद हुए।
युद्ध के मुहाने पर दुनिया: ट्रंप की सख्त चेतावनी
बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ा तनाव है। ईरान द्वारा यूएई पर मिसाइल हमलों और दक्षिण कोरियाई कार्गो जहाज पर फायरिंग ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर खतरा पैदा कर दिया है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अमेरिकी जहाजों या कार्गो की सुरक्षा में लगे सैन्य दलों पर हमला किया, तो "ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटा दिया जाएगा।" अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती इस तल्खी ने वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित निवेश (जैसे सोना) की ओर भागने पर मजबूर कर दिया है, जिससे इक्विटी बाजार से पैसा निकल रहा है।
निष्कर्ष: जब तक पश्चिम एशिया में शांति के संकेत नहीं मिलते, घरेलू बाजार में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है। निवेशकों को फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनानी चाहिए।
