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यात्रा 2026 : दर्शन के साथ आस्था, रहस्य और आध्यात्म के इस अनूठे संगम को बनाएं यादगार
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते ही चार धाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। यदि आप भी इस पवित्र यात्रा पर जा रहे हैं, तो मुख्य मंदिर दर्शन के साथ आसपास स्थित व्यास गुफा, भीम पुल, वसुधारा झरना, तप्त कुंड और भविष्य बद्री जैसे आध्यात्मिक स्थलों के दर्शन अवश्य करें। ये स्थान न केवल पौराणिक महत्व रखते हैं, बल्कि यात्रा को अधिक सार्थक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध भी बनाते हैं।
भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम ड्यूटी और फेस रिकग्निशन सिस्टम की शुरुआत
नेपाल ने 100 नेपाली रुपये से अधिक सामान पर कस्टम ड्यूटी लागू की है। भारत सोनौली बॉर्डर सहित कुछ सीमाओं पर फेस रिकग्निशन सिस्टम शुरू कर रहा है, जिससे यात्रियों का डेटा रिकॉर्ड किया जाएगा। इन बदलावों का उद्देश्य सुरक्षा और सीमा नियंत्रण को मजबूत करना है, लेकिन यात्रियों के लिए प्रक्रिया थोड़ी सख्त और समय लेने वाली हो सकती है।
दिव्य कुंड : जहां का पानी पीने से मोक्ष मिलने का दावा, जानिए कैसे और कब पहुंचें यहां
यात्रा भगवान शिव के दर्शन तक सीमित नहीं है, यहां स्थित दिव्य कुंडों का भी विशेष धार्मिक महत्व है। उदक कुंड और अमृत कुंड सहित पांच पवित्र जल स्रोतों के दर्शन और जल का स्पर्श जीवन के पापों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग माना जाता है। यह खबर आपको न सिर्फ इन कुंडों की महिमा बताएगी, बल्कि यात्रा के दौरान क्या करें इसका भी मार्गदर्शन देगी।
खुले कपाट : भक्तिभाव और उत्साह के बीच आस्था और श्रद्धा के साथ शुरू हुई चारधाम यात्रा
22 अप्रैल की सुबह केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए विधिवत रूप से खोल दिए गए, जिससे चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गई। इससे पहले भगवान केदारनाथ की डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विभिन्न पड़ावों से होकर गौरीकुंड पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया। पूरे केदारपुरी क्षेत्र को फूलों से सजाया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय बन गया। भारी भीड़ के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग पर कुछ जगहों पर जाम और कठिनाइयों की स्थिति भी बनी, जिसके चलते प्रशासन ने यात्रियों से धैर्य रखने की अपील की है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था पूरे जोश में बनी रही।
केदारनाथ यात्रा : बर्फ के बीच श्रद्धालु अनुभव करेंगे श्रद्धा और एक नया रोमांच
यह लेख केदारनाथ यात्रा 2026 को एक विशेष “स्नो कॉरिडोर” के साथ साहसिक और आध्यात्मिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करता है, जहाँ श्रद्धालु बर्फीले हिमालयी मार्गों से होकर बाबा केदारनाथ के दर्शन करेंगे। इसमें यात्रा को सुरक्षित और रोमांचक बनाने के लिए प्रशासनिक तैयारियों, जैसे बर्फ हटाने, निगरानी और अलर्ट सिस्टम का उल्लेख किया गया है। साथ ही ग्लेशियरों और भारी बर्फबारी से जुड़ी चुनौतियों को भी यात्रा का हिस्सा बताया गया है। अंत में इसे श्रद्धा, साहस और प्रकृति के अद्भुत संगम वाली अविस्मरणीय तीर्थयात्रा के रूप में दर्शाया गया है।
चण्डी माता: प्रकृति का सौंदर्य मिलकर रचते हैं अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के घुंचापाली की पहाड़ियों में स्थित चण्डी डोंगरी आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। यहां मां चण्डी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा, प्राचीन पूजा परंपराएं, रहस्यमयी कथाएं और जनसहयोग से विकसित भव्य मंदिर श्रद्धालुओं को गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं।