पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 के शुरू होने से पहले ही शिव भक्तों के लिए एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आई है। शनिवार को बाबा बर्फानी की इस सीजन की पहली तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि गुफा के भीतर 6 से 7 फीट का भव्य शिवलिंग अपने पूर्ण आकार में आ चुका है। पवित्र गुफा और ट्रैक की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबलों के जवानों ने सबसे पहले बाबा बर्फानी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया।
इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा) तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। यात्रा अपने दो पारंपरिक रास्तों— बालटाल-सोनमर्ग मार्ग और नुनवान-पहलगाम मार्ग से संचालित की जाएगी।
बर्फ की सफेद चादर के बीच BRO का 'ऑपरेशन रेस्क्यू ट्रैक'
यात्रा मार्ग पर इस समय भी मौसम की कड़ी चुनौती बनी हुई है, लेकिन सीमा सड़क संगठन (BRO) के हौसले बर्फ से भी मजबूत हैं।
12 फीट तक जमी है बर्फ: सामान्य रास्तों पर जहाँ 6 से 8 फीट बर्फ है, वहीं हिमस्खलन (Avalanche) वाले संवेदनशील इलाकों में 10 से 12 फीट तक बर्फ की मोटी परत जमी हुई है।
युद्धस्तर पर काम जारी: BRO ने बालटाल मार्ग पर 9 किलोमीटर और नुनवान-पहलगाम मार्ग पर 8 किलोमीटर तक के ट्रैक से बर्फ को पूरी तरह साफ कर दिया है।
ट्रैक का आधुनिकीकरण: तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रैक को 12 फीट तक चौड़ा किया जा रहा है। इसके साथ ही सतह को समतल करने, रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवारें) और कल्वर्ट (पुलिया) बनाने का काम चौबीसों घंटे चल रहा है। अधिकारियों का दावा है कि 15 जून तक दोनों रास्ते शत-प्रतिशत तैयार कर लिए जाएंगे।
इस बार 'टेंट' नहीं, 'फाइबर पैलेस' में ठहरेंगे भक्त
श्रद्धालुओं के ठहरने के अनुभव को बेहतर और आरामदायक बनाने के लिए इस बार प्रशासन ने ऐतिहासिक बदलाव किए हैं:
प्री-फैब्रिकेटेड और फाइबर स्ट्रक्चर: इस बार बेस कैंपों में पारंपरिक टेंटों की जगह आधुनिक फाइबर स्ट्रक्चर और प्री-फैब्रिकेटेड इमारतें खड़ी की जा रही हैं। यह काम पिछले 3 सालों से चल रहा था, जो अब अंतिम चरण में है।
मौसम की मार से सुरक्षा: ये फाइबर केबिन माइनस तापमान, अचानक होने वाली भारी बर्फबारी और मूसलाधार बारिश को झेलने में पूरी तरह सक्षम हैं।
थ्री-स्टार जैसी सुविधाएं: हर आधुनिक इमारत में 48 कमरे बनाए गए हैं। सभी कमरों में अटैच्ड वॉशरूम, चौबीसों घंटे ठंडे-गर्म पानी की सुविधा और हर बिल्डिंग में एक इन-हाउस पैंट्री (रसोई) की व्यवस्था की गई है।
आपदा संभावित क्षेत्र अब 'नो-एंट्री जोन'
साल 2022 में आई अचानक बाढ़ (Flash Flood) और बादल फटने की घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार सुरक्षा के बेहद कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं:
बड़ा फैसला: इस बार किसी भी स्थिति में बाढ़ या भूस्खलन की आशंका वाले संवेदनशील इलाकों में टेंट या कैंप नहीं लगाए जाएंगे। इन डेंजर ज़ोन को 'नो-एंट्री जोन' घोषित कर दिया गया है।
रास्ते के सभी पुराने और जर्जर पुलों को हटाकर नए और मजबूत पुल बनाए गए हैं, ताकि आपातकालीन स्थिति में भी आवाजाही प्रभावित न हो।
रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 3.6 लाख पार, 5 लाख पहुंचने की उम्मीद
बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देश-विदेश से भक्तों का तांता लगने वाला है। 15 अप्रैल से शुरू हुई पंजीकरण प्रक्रिया में अब तक 3.6 लाख से अधिक श्रद्धालु अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
ग्रुप रजिस्ट्रेशन बंद: 5 से 30 लोगों के ग्रुप में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन की खिड़की बुधवार को बंद हो चुकी है।
व्यक्तिगत स्लॉट अब भी खुले: अकेले या छोटे ग्रुप में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अभी भी सीटें खाली रहने तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी रहेगी। श्रद्धालु पंजाब नेशनल बैंक (PNB), जम्मू-कश्मीर बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और यस बैंक की अधिकृत शाखाओं से अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
टूटेगा रिकॉर्ड? अधिकारियों को उम्मीद है कि इस साल कुल यात्रियों की संख्या 5 लाख के पार जा सकती है। गौरतलब है कि साल 2024 में 5.10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 4.14 लाख रहा था।
