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बारिश में खूबसूरत कोंडागांव की घाटी और झरना
बारिश में खूबसूरत कोंडागांव की घाटी और झरना
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बदला कोंडागांव का नजारा : मॉनसून में जन्नत सी सज गई है बस्तर की ये खूबसूरत जगह

मॉनसून के आगमन के साथ छत्तीसगढ़ का कोंडागांव प्राकृतिक खूबसूरती से भर उठा है। केशकाल घाटी, टाटामारी, मांझीनगढ़ और खूबसूरत झरने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। बारिश के मौसम में यहां घूमने से पहले जरूरी सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 16 Jul 2026, 10:42 AM · अपडेट: 13 Oct 2026, 12:57 AM
कोंडागांव
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
अगर आप इस मॉनसून में रोज-मर्रा की भागदौड़ से दूर प्रकृति की गोद में कुछ सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ का कोंडागांव इस वक्त किसी जन्नत से कम नहीं लग रहा है। झमाझम बारिश के बीच यहां के पहाड़, वादियां और झरने अपनी पूरी शबाब पर हैं। 'शिल्प शहर' के नाम से मशहूर कोंडागांव अपनी आदिवासी संस्कृति के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।  अगर आप भी यहां आने का मन बना रहे हैं, तो चलिए आपको बताते हैं कि इस मौसम में कौन सी जगहें आपका दिल जीत लेंगी और इस रिमझिम फुहारों के बीच आपको सुरक्षा के क्या कदम उठाने हैं। 

12 मोड़ों वाली जादुई केशकाल घाटी 

कोंडागांव में दाखिल होते ही सबसे पहले आपका स्वागत करती है शानदार केशकाल घाटी। इस मौसम में जब आप इसके 12 घुमावदार मोड़ों (भंवर) से गुजरेंगे, तो ऐसा लगेगा मानो आप बादलों के बीच तैर रहे हैं। घाटी के चारों तरफ पसरी हरियाली और गहरी खाइयां सफर का रोमांच दोगुना कर देती हैं।

बादलों को छूता टाटामारी और मांझीनगढ़ 

इको-टूरिज्म के शौकीनों के लिए टाटामारी और मांझीनगढ़ इस समय बेस्ट स्पॉट बने हुए हैं। टाटामारी के ऊंचे पठार से जब नीचे की वादियों को देखा जाता है, तो नजारा अद्भुत नजर आता है। वहीं मांझीनगढ़ में आपको घने जंगलों के साथ-साथ रहस्यमयी प्रागैतिहासिक शैलचित्र भी देखने को मिल जाएंगे।

शबाब पर यहां के झरने 

बारिश के दिनों में कोंडागांव के जलप्रपात जैसे जी उठे हैं। कटुलकासा जलप्रपात, चेरबेड़ा, उमरादह और लिंग-दरहा जैसे झरने इन दिनों दूधिया पानी से लबालब हैं। घने जंगलों के बीच चट्टानों से गिरते पानी का शोर कानों में किसी संगीत की तरह घुलता है।

आस्था का केंद्र: कोपाबेड़ा शिव मंदिर और आलोर गुफा 

धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए नारंगी नदी के किनारे बसा कोपाबेड़ा का प्राचीन शिव मंदिर एक बेहतरीन जगह है। इसके अलावा आलोर की पहाड़ियों में स्थित लिंगेश्वरी माता की गुफा भी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र है।

मौसम का हाल और जरूरी सावधानियां

झरनों और नदियों से बनाकर रखें दूरी: बारिश के मौसम में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए किसी भी झरने के बहुत करीब जाने या नदी में उतरकर सेल्फी लेने की गलती बिल्कुल न करें।
घाटियों में ड्राइविंग के वक्त बरतें एहतियात: केशकाल घाटी में बारिश के दौरान भारी कोहरा छा जाता है, जिससे विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है। मोड़ों पर गाड़ी की रफ्तार धीमी रखें और फॉग लाइट्स का इस्तेमाल जरूर करें।
ट्रेकिंग के दौरान रहें सतर्क: जंगलों या पहाड़ियों पर बने रास्तों पर फिसलन बहुत ज्यादा बढ़ गई है। अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनें और अनजान रास्तों पर बिना स्थानीय गाइड के अंदर न जाएं, क्योंकि इन दिनों कीड़े-मकोड़ों और सांपों का खतरा भी बढ़ जाता है।  
नेटवर्क की समस्या: जंगलों और अंदरूनी इलाकों में जाने पर मोबाइल नेटवर्क गायब हो सकता है। इसलिए अपने परिवार को पहले से सूचित करके निकलें और ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लें।
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