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Rajgir Crow Mystery Story (Image Source: Social Media)
Rajgir Crow Mystery Story (Image Source: Social Media)
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Rajgir Malmas Mela: 1 महीने तक एक भी कौआ नहीं आता नज़र, बिहार के इस ऐतिहासिक शहर में छिपा है अनोखा पौराणिक रहस्य

Rajgir Malmas Mela: बिहार के राजगीर में मलमास के दौरान कौए दिखाई नहीं देने की अनोखी पौराणिक मान्यता प्रचलित है। राजा वसु के यज्ञ से जुड़ी इस कथा के अलावा यहां के 22 कुंड और 52 जलधाराएं भी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।

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प्रकाशित: 05 Nov 2026, 06:17 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
बिहार
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Rajgir Malmas Mela: बिहार के राजगीर में मलमास के दौरान कौओं के नजर नहीं आने की एक अनोखी मान्यता प्रचलित है। स्थानीय लोककथा के अनुसार, इसके पीछे राजा वसु के यज्ञ से जुड़ी एक पौराणिक घटना है। यही नहीं, राजगीर के 22 कुंड और 52 जलधाराएं भी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। हिंदू धर्म में अधिक मास यानी मलमास को भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष महत्व दिया गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान बिहार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल राजगीर में मलमास मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

राजा वसु के यज्ञ से जुड़ा है कौओं के रूठने का रहस्य 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा वसु ने एक बार राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में विशाल यज्ञ का आयोजन किया था। इस धार्मिक अनुष्ठान में उन्होंने 33 करोड़ देवी-देवताओं को आमंत्रित किया था। मान्यता है कि सभी देवी-देवता यज्ञ में शामिल होने पहुंचे, लेकिन राजा वसु कौए को आमंत्रित करना भूल गए। कहा जाता है कि इस बात से कौआ नाराज हो गया और उसने मलमास के पूरे महीने राजगीर से दूरी बना ली। लोकमान्यता के मुताबिक, तभी से अधिक मास के दौरान यहां कौए दिखाई नहीं देते। हालांकि, यह धार्मिक आस्था और पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता है।

ब्रह्माजी ने बनवाए थे 22 कुंड और 52 जलधाराएं 

राजगीर की खासियत सिर्फ कौओं से जुड़ी इस कथा तक सीमित नहीं है। यहां मौजूद प्राचीन कुंड और गर्म जलधाराएं भी धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यज्ञ में शामिल होने आए देवी-देवताओं को एक ही कुंड में स्नान करने में परेशानी हो रही थी। इसके बाद ब्रह्माजी ने 22 कुंड और 52 जलधाराओं का निर्माण कराया था। वैभारगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित इन कुंडों में गर्म पानी के झरने मिलते हैं। मान्यता है कि इनका जल सप्तकर्णी गुफाओं से आता है। इनमें ब्रह्मकुंड को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। इसे पाताल गंगा के नाम से भी जाना जाता है।

मलमास में 33 करोड़ देवी-देवताओं के निवास की मान्यता 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास के दौरान राजगीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास होता है। यहां भगवान विष्णु की शालिग्राम स्वरूप में पूजा-अर्चना की जाती है। इसी धार्मिक महत्व के कारण हर अधिक मास में राजगीर में मलमास मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पवित्र कुंडों में स्नान करते हैं और पूजा-पाठ, दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि मलमास में इन कुंडों में स्नान करने और धार्मिक कार्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा पापों से मुक्ति मिलती है। इस तरह राजगीर की पहचान केवल अपने धार्मिक स्थलों और गर्म जलकुंडों तक सीमित नहीं है। कौओं के रूठने की पौराणिक कथा और मलमास मेले की परंपरा इसे देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में एक अलग पहचान देती है।
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