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The religious legend behind celebrating Dhanteras (Image Source: Keertiman Media)
The religious legend behind celebrating Dhanteras (Image Source: Keertiman Media)
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Dhanteras History: आखिर क्यों मनाया जाता है धनतेरस, जानिए इसके पीछे की पूरी पौराणिक कथा और महत्व

Dhanteras History: दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धनवंतरी, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। जानिए समुद्र मंथन से जुड़ी इसकी पौराणिक मान्यता, यम दीपदान की कथा और इस दिन खरीदारी का धार्मिक महत्व।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Nov 2026, 02:48 PM · 5 मिनट पढ़ने का समय
धर्म-कर्म
स्रोत: स्वयं रिपोर्ट
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Dhanteras History: दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत हो चुकी है और इस उत्सव का सबसे पहला और महत्वपूर्ण पड़ाव है-धनतेरस। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आने वाले इस पर्व को लेकर लोगों में हमेशा एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। बाजार की रौनक, बर्तनों की खनक और आभूषणों की चमक इस दिन की भव्यता में चार चांद लगा देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दीपावली से ठीक दो दिन पहले मनाए जाने वाले इस पर्व की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे का असली धार्मिक और पौराणिक रहस्य क्या है?

क्यों मनाया जाता है धनतेरस? 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। चूंकि भगवान धनवंतरी अपने साथ स्वास्थ्य और आरोग्यता का वरदान लेकर आए थे, इसलिए इस दिन को उनके प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। समय के साथ इसमें मां लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की परंपरा भी जुड़ गई, क्योंकि स्वास्थ्य के साथ धन का होना भी जीवन को सुखी बनाने के लिए उतना ही जरूरी है।

कौन हैं भगवान धनवंतरी और क्यों की जाती है उनकी पूजा? 

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान धनवंतरी को देवताओं के वैद्य (चिकित्सक) यानी आयुर्वेद के जनक के रूप में पूजा जाता है। जब देवताओं और असुरों के बीच क्षीर सागर का मंथन हो रहा था, तब चौदह रत्नों में से भगवान धनवंतरी अंतिम चरण में अमृत कलश के साथ बाहर आए थे। चूंकि वे संसार को रोगों से मुक्त करने और लंबी आयु का आशीर्वाद देने वाले देवता हैं, इसलिए धनतेरस के दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इनकी आराधना करने से घर के सदस्यों को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

धनतेरस मनाने की परंपरा के पीछे की पौराणिक कथा

धनतेरस के दिन यमराज की पूजा का भी विशेष विधान है, जिसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और मार्मिक कथा जुड़ी हुई है:

कथा: प्राचीन काल में राजा हिमराज के यहाँ एक पुत्र का जन्म हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि विवाह के ठीक चौथे दिन ही इस राजकुमार की मृत्यु सांप के काटने से हो जाएगी। जब राजकुमार की शादी का दिन आया, तो उसकी पत्नी ने उसे मृत्यु के मुंह से बचाने के लिए एक अनोखी तरकीब निकाली। विवाह की चौथी रात को उसने अपने पति को सोने नहीं दिया और कमरे के दरवाजे पर ढेर सारे सोने-चांदी के आभूषण और रोशनी के लिए कई दिए जला दिए।

जब यमराज राजकुमार के प्राण लेने के लिए सर्प का रूप धारण कर अंदर आने लगे, तो कमरों की तेज रोशनी और चमक-धमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं। इसके बाद यमराज राजकुमार के बिस्तर पर न बैठकर, बाहर ही बैठ गए और पूरी रात राजकुमार की पत्नी द्वारा गाए जा रहे मधुर लोकगीत और कहानियां सुनते रहे। सुबह होते ही यमराज को बिना प्राण लिए ही खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।

तभी से इस दिन को 'यम दीपदान' और धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा। मान्यता है कि जो परिवार इस दिन यमराज के नाम का दीया जलाता है, उसके घर में अकाल मृत्यु का भय कभी नहीं रहता।

किन देवी-देवताओं की होती है आराधना?

धनतेरस के पावन अवसर पर मुख्य रूप से तीन शक्तियों की पूजा की जाती है:

  1. भगवान धनवंतरी: आरोग्यता और चिकित्सा के देवता।

  2. माता लक्ष्मी: धन, वैभव और समृद्धि की देवी।

  3. कुबेर देव: धन के संरक्षक और कोषाध्यक्ष।

इन तीनों की संयुक्त पूजा का संदेश यही है कि जीवन में केवल धन होना ही काफी नहीं है, बल्कि उस धन का आनंद उठाने और जीवन जीने के लिए 'निरोगी काया' (स्वास्थ्य) का होना भी उतना ही आवश्यक है।

धार्मिक कारण और आधुनिक संदर्भ 

धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन किसी भी नई वस्तु—विशेषकर बर्तन, सोना, चांदी, या भूमि-भवन की खरीदारी को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु में तेरह गुना वृद्धि होती है। इस परंपरा के पीछे जीवन में बरकत और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने की भावना छिपी है। संक्षेप में कहें तो, धनतेरस केवल खरीदारी का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करने का एक पवित्र अवसर है।

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