Chhattisgarh News: मानसिक रूप से अस्वस्थ और विशेष देखभाल की जरूरत वाले लोगों के लिए संचालित घरौंदा केंद्रों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर के पुरुष केंद्र में एक दिव्यांग को पलंग के पायों से बांधकर रखने का मामला सामने आया है। वहीं, रायपुर के महिला घरौंदा केंद्र में इस साल चार महिलाओं और एक पांच वर्षीय बच्चे की मौत का खुलासा हुआ है। मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट कमिश्नरों की निरीक्षण रिपोर्ट में केंद्रों की स्वास्थ्य सेवाओं, साफ-सफाई और देखभाल व्यवस्था में कई खामियां सामने आई हैं। दरअसल, घरौंदा केंद्रों की खराब स्थिति को लेकर 'कोपल वाणी चाइल्ड वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन' ने वर्ष 2020 में जनहित याचिका दायर की थी।
मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए हाई कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति की थी। कमिश्नरों ने 3 नवंबर को अपनी संयुक्त जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी दिशा-निर्देशों में सप्ताह में दो बार डॉक्टरों का केंद्रों में दौरा अनिवार्य है, लेकिन रायपुर और बिलासपुर में इसका पालन नहीं हो रहा है। दोनों जगह महीने में मुश्किल से एक या दो बार ही डॉक्टरों के आने का रिकॉर्ड मिला। इतना ही नहीं, केंद्रों में चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाला नर्सिंग या पैरामेडिकल स्टाफ भी नहीं मिला।
रायपुर घरौंदा केंद्र में पांच मौतें, बच्चे की मौत की स्वतंत्र जांच की सिफारिश
निरीक्षण रिपोर्ट में रायपुर महिला घरौंदा केंद्र में इस साल हुई पांच मौतों का उल्लेख किया गया है। इनमें शोभा (30), कुमारी बाई (35), मीना (30), कुसुम (45) और पांच वर्षीय बालक कबीर शामिल हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, कबीर की मौत 10 अगस्त को सेप्सिस और रिफ्रैक्टरी शॉक के कारण हुई थी। केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि बच्चा पहले स्वस्थ था और पलंग से गिरने के बाद उसे दौरे पड़ने लगे थे। हालांकि, अस्पताल के दस्तावेजों में उसकी पहले से कई गंभीर बीमारियों का जिक्र मिला है। केंद्र के कर्मचारियों के बयान और अस्पताल के रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने के बाद कोर्ट कमिश्नर ने बच्चे की मौत की जांच किसी स्वतंत्र चिकित्सा विशेषज्ञ से कराने की सिफारिश की है। इसके अलावा, केंद्र में हुई मौतों की जानकारी पुलिस, जिला समिति या वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे जाने से जुड़े दस्तावेज भी निरीक्षण के दौरान नहीं मिले।
बिलासपुर में दिव्यांग को पलंग से बांधा, खोलने पर सामान्य मिला
बिलासपुर के पुरुष घरौंदा केंद्र में निरीक्षण के दौरान एक दिव्यांग व्यक्ति को कपड़े से पलंग के पायों के साथ बंधा हुआ पाया गया। कोर्ट कमिश्नर शिवाली दुबे के पहुंचने पर केंद्र के कर्मचारियों ने सफाई दी कि संबंधित व्यक्ति के आक्रामक व्यवहार की आशंका के कारण उसे करीब आधे घंटे से बांधकर रखा गया था। हालांकि, इस कार्रवाई के लिए न तो किसी डॉक्टर की सलाह ली गई थी और न ही कोई लिखित अनुमति मौजूद थी। कोर्ट कमिश्नर के निर्देश पर जब व्यक्ति को खोला गया, तो उसका व्यवहार सामान्य रहा। वह शौचालय गया और बाद में दूसरे निवासियों के साथ जाकर बैठ गया। इस घटना ने केंद्र में रह रहे विशेष देखभाल की जरूरत वाले लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।गंदगी और भोजन की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान बिलासपुर के केंद्रों में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। शौचालयों में गंदगी पाई गई, जबकि निवासियों को दिया जाने वाला भोजन गुणवत्ता और मात्रा दोनों के लिहाज से कमतर बताया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की जरूरतों और समस्याओं को समझने के लिए केंद्रों में प्रशिक्षित संवाद व्यवस्था नहीं है। इससे वहां रहने वाले लोगों की देखभाल और उनकी समस्याओं के समय पर समाधान को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्रों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कुछ अहम सवाल उठाए हैं।
हाई कोर्ट के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:
- राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर निरीक्षण रिपोर्ट पर अपना विस्तृत जवाब देना होगा।
- सरकार को स्पष्ट करना होगा कि कोर्ट कमिश्नरों को घरौंदा केंद्रों के सीसीटीवी कैमरों का सीधा एक्सेस दिया जा सकता है या नहीं।
- सभी जिलों के नोडल अधिकारियों को हर महीने की प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से कोर्ट कमिश्नरों के सामने प्रस्तुत करनी होगी।
निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई इन खामियों के बाद अब राज्य सरकार के जवाब और घरौंदा केंद्रों की व्यवस्था में होने वाले सुधारों पर नजर रहेगी।







