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अस्पताल में इलाज में देरी और लापरवाही के आरोप
अस्पताल में इलाज में देरी और लापरवाही के आरोप
कांकेर (उत्तर बस्तर)

विवाद : प्रसूता और नवजात की मौत से हड़कंप स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोली

भानुप्रतापपुर (कांकेर) में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक आदिवासी महिला और उसके नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर इलाज और उचित देखरेख नहीं मिली, साथ ही सोनोग्राफी मशीन खराब होने और एम्बुलेंस सुविधा न मिलने से उन्हें निजी केंद्र जाना पड़ा।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 22 May 2026, 04:53 PM · अपडेट: 05 Nov 2026, 06:39 AM
कांकेर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

 भानुप्रतापपुर से स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को उजागर करने वाला मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक आदिवासी महिला और उसके नवजात शिशु की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर उपचार नहीं मिलने और चिकित्सकों की कथित लापरवाही के कारण दोनों की जान चली गई।

प्रसव पीड़ा के बाद 15 मई को अस्पताल में भर्ती

जानकारी के अनुसार ग्राम चाहचाड निवासी कमलेश कोमरा अपनी गर्भवती पत्नी द्रोपदी कोमरा को प्रसव पीड़ा होने पर 15 मई को भानुप्रतापपुर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद भी महिला को आवश्यक चिकित्सकीय देखरेख नहीं मिली और वह दो दिनों तक दर्द से परेशान रही।बताया गया कि 17 मई को अस्पताल कर्मियों ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी, लेकिन सरकारी अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन लंबे समय से खराब होने के कारण जांच संभव नहीं हो सकी। एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर पति को अपनी गर्भवती पत्नी को बाइक से निजी केंद्र ले जाकर जांच करानी पड़ी।

रिपोर्ट के बाद भी डॉक्टर की अनुपस्थिति का आरोप

परिजनों का कहना है कि रिपोर्ट लेकर लौटने के बाद भी चिकित्सक अस्पताल नहीं पहुंचे। आरोप है कि ऑन-कॉल डॉक्टर को कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।महिला की स्थिति लगातार बिगड़ने पर परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां देर रात प्रसव कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार गर्भ में संक्रमण फैलने के कारण नवजात शिशु ने जन्म के कुछ समय बाद दम तोड़ दिया। वहीं कुछ घंटों बाद प्रसूता द्रोपदी की भी मौत हो गई।घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मृतका की मां ने भावुक होकर कहा कि यदि समय रहते उचित इलाज मिल जाता तो उनकी बेटी और नाती की जान बच सकती थी।

परिजनों ने की कार्रवाई की मांग

मृतका के पति कमलेश कोमरा ने बताया कि पूर्व में कराई गई जांच रिपोर्ट सामान्य थी और बेहतर उपचार की उम्मीद से वे भानुप्रतापपुर अस्पताल पहुंचे थे। उनका आरोप है कि अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण यह दुखद स्थिति निर्मित हुई।मामले में ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. गोटा ने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामान्य थीं और मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया था। हालांकि घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और जिम्मेदारों के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई की मांग उठ रही हैइस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था, चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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