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Delhi High Court ruling on DU admissions and CUET subject mapping (Image Source: AI Photo)
Delhi High Court ruling on DU admissions and CUET subject mapping (Image Source: AI Photo)
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DU Admission: CUET में अच्छे नंबर भी नहीं आएंगे काम! DU एडमिशन को लेकर हाई कोर्ट ने क्यों सुनाया बड़ा फैसला

DU Admission: दिल्ली हाई कोर्ट ने DU की सब्जेक्ट-मैपिंग नीति को सही ठहराया है। अब 12वीं में पढ़े गए विषयों से अलग विषयों में CUET देने वाले छात्रों को निर्धारित पात्रता पूरी किए बिना दाखिला नहीं मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि CUET की मेरिट से विश्वविद्यालय के अनिवार्य प्रवेश नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 04 Nov 2026, 01:51 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
DU Admission: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के स्नातक (Graduation) दाखिला नियमों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद अहम और बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट के नए रुख के मुताबिक, अब 12वीं में पढ़े गए विषयों से इतर किसी अन्य विषय में CUET (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) देने पर छात्रों को डीयू में एडमिशन नहीं मिलेगा। अदालत ने यूनिवर्सिटी की अनिवार्य 'सब्जेक्ट-मैपिंग' नीति पर अपनी मुहर लगाते हुए याचिकाकर्ता की दलील खारिज कर दी। मंगलवार को फैसला सुनाते हुए जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने साफ किया कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को अपने यहां प्रवेश के मानक तय करने का पूर्ण अधिकार है। अदालत ने टिप्पणी की कि CUET में सिर्फ बेहतर मेरिट अंक हासिल कर लेना ही दाखिले की मूलभूत योग्यताओं का विकल्प नहीं बन सकता।

क्या था पूरा विवाद?

यह पूरा मामला सुवन यदुवंशी नाम के एक छात्र से जुड़ा है, जिन्होंने शिवाजी कॉलेज में बीए (ऑनर्स) इतिहास में प्रोविजनल एडमिशन मिलने के बाद रद्द किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी।

  • छात्र का बैकग्राउंड: छात्र ने साल 2021 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) से 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी।

  • विषय परिवर्तन: सत्र 2025-26 के लिए छात्र ने CUET-UG में अंग्रेजी, भूगोल, इतिहास और राजनीति विज्ञान विषयों की परीक्षा दी।

  • रद्द हुआ दाखिला: अंक बेहतर होने के चलते CW (सशस्त्र बल) कोटा के तहत शिवाजी कॉलेज में सीट तो मिल गई, लेकिन 17 अगस्त 2025 को यूनिवर्सिटी ने सब्जेक्ट-मैपिंग का नियम पूरा न होने की वजह से उनका आवंटन रद्द कर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

कोर्ट ने छात्र की याचिका खारिज करते हुए कई कड़े और स्पष्ट बिंदु रखे:

  1. पात्रता बनाम मेरिट: सीयूईटी की मेरिट रैंकिंग केवल उन्हीं छात्रों के बीच चयन प्रक्रिया का माध्यम है जो पहले से अनिवार्य शर्तें पूरी करते हों। मेरिट लिस्ट किसी यूनिवर्सिटी के दाखिला नियमों को दरकिनार नहीं कर सकती।

  2. संविधान और NEP पर रुख: छात्र ने डीयू के 'बुलेटिन ऑफ इंफॉर्मेशन' (क्लॉज-5) को अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था और इसे नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के खिलाफ ठहराया था। कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।

  3. शैक्षणिक संस्थानों का अधिकार: अदालत ने स्पष्ट किया कि एजुकेशन पॉलिसी और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया तय करना विशेषज्ञों का काम है। इसमें न्यायपालिका का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

हाई कोर्ट ने माना कि डीयू का यह नियम उच्च शिक्षा के स्तर को बनाए रखने और फर्जी/छाया स्कूलों (Shadow Schools) के जरिए अचानक विषय बदलने जैसी गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए पूरी तरह तर्कसंगत और जरूरी है।

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