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स्वास्थ्य संस्थानों में सुधार अभियान शुरू
स्वास्थ्य संस्थानों में सुधार अभियान शुरू
सारंगढ़-बिलाईगढ़

स्वास्थ्य विभाग : मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव, जिला प्रशासन ने कसी कमर

जिला स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नई कार्ययोजना लागू की है। इसके तहत उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समयपूर्व पहचान, शत-प्रतिशत पंजीयन, नियमित एएनसी जांच और ईडीडी ट्रैकिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों की रोकथाम हेतु अभियान चलाया जा रहा है और सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच, दवा वितरण व रेफरल व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 10 Jun 2026, 05:51 PM · अपडेट: 08 Oct 2026, 11:33 AM
सारंगढ़- बिलाईगढ़
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

जिला स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को प्राथमिकता देते हुए एक विस्तृत और सुदृढ़ कार्ययोजना लागू की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य मातृ मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाना और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समयपूर्व पहचान को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही गर्भवती महिलाओं का प्रथम तिमाही में शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे गर्भावस्था की शुरुआती अवस्था से ही निगरानी संभव होगी और जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा। नियमित एएनसी जांच, चार गुणवत्तापूर्ण जांचों की अनिवार्यता और समय पर रेफरल व्यवस्था को भी प्रभावी बनाया जा रहा है।

नियमित मॉनिटरिंग और प्रसव पूर्व जांच प्रणाली होगी मजबूत

प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित मॉनिटरिंग के साथ ईडीडी (प्रसव संभावित तिथि) ट्रैकिंग प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी आवश्यक प्रसव पूर्व जांच समय पर पूरी की जाएं। रक्तचाप, हीमोग्लोबिन सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचों की नियमितता सुनिश्चित कर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर सतत निगरानी रखी जाएगी। जिले में मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों जैसे उच्च रक्तचाप, एनीमिया, प्रसवोत्तर रक्तस्राव और संक्रमण की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में रक्तचाप जांच, एचबी टेस्ट और आयरन-फोलिक एसिड वितरण को अनिवार्य किया गया है। उच्च जोखिम मामलों में तुरंत उपचार और रेफरल की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में देरी न हो।

स्वास्थ्य संस्थानों और रेफरल व्यवस्था को किया जा रहा सुदृढ़

जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। एम्बुलेंस नेटवर्क को और अधिक प्रभावी बनाते हुए आपातकालीन स्थिति में तेज रेफरल सुनिश्चित किया जा रहा है। स्वास्थ्य प्रशासन का लक्ष्य है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सके। स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक मातृ मृत्यु मामले की विस्तृत समीक्षा कर रहा है और कारणों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। इन निष्कर्षों के आधार पर सुधारात्मक कदम भी तुरंत लागू किए जा रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार और प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।

सुरक्षित मातृत्व के लक्ष्य की ओर बढ़ता जिला प्रशासन

जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया है कि योजनाबद्ध प्रयासों, नियमित निगरानी और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जाएगी। विभाग का उद्देश्य प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को लगातार कम करते हुए सुरक्षित मातृत्व का लक्ष्य प्राप्त करना है।

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