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बनारस वैश्विक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र
बनारस वैश्विक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र
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ये हैं बनारस... जिस शहर में मौत भी उत्सव है, वहाँ जिंदगी कितनी हसीन होगी?  

घाटों की सुबह से लेकर सारनाथ के सुकूँ तक, जानिए क्यों खास है बाबा विश्वनाथ की नगरी और क्या है यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थलों का इतिहास। दुनिया के सबसे प्राचीन जीवंत शहरों में से एक है और आज यह वैश्विक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

कीर्तिमान न्यूज
27 May 2026, 04:21 PM
वाराणसी
जल्द आ रहा है सारांश सुनने की सुविधा जल्द उपलब्ध होगी

सनातनी संस्कृति और दुनिया के सबसे प्राचीन जीवंत शहरों में शुमार 'बनारस' (वाराणसी) आज वैश्विक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद से यहाँ पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आमद ने नए रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अगर आप भी मोक्ष की नगरी बनारस आने का प्लान बना रहे हैं, तो यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थलों की पूरी डिटेल, इतिहास और महत्व को समझना बेहद जरूरी है। आइए डालते हैं एक विस्तृत नजर:

बनारस यात्रा की शुरुआत बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक यह मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से है।

  • इतिहास और महत्व: इस मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। इसके बाद पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखरों पर सोना मढ़वाया था।

  • न्यूज अपडेट (कॉरिडोर): हाल के वर्षों में बने 'काशी विश्वनाथ धाम' (कॉरिडोर) ने मंदिर का कायाकल्प कर दिया है। अब गंगा घाट (ललिता घाट) से श्रद्धालु सीधे बाबा के दरबार में प्रवेश कर सकते हैं।

  • टूरिस्ट गाइड: भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी या सुगम दर्शन का विकल्प चुनें। परिसर के अंदर मोबाइल और बड़े बैग ले जाना प्रतिबंधित है।

दशाश्वमेध घाट: जहाँ साक्षात उतरती है आध्यात्मिकता

बनारस में वैसे तो 84 घाट हैं, लेकिन दशाश्वमेध घाट को यहाँ का हृदय स्थल माना जाता है।

  • पौराणिक मान्यता: माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने यहाँ दस अश्वमेध यज्ञ किए थे, इसीलिए इसका नाम दशाश्वमेध पड़ा।

  • मुख्य आकर्षण (भव्य गंगा आरती): हर शाम यहाँ होने वाली 'गंगा महाआरती' को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक जुटते हैं। शंखनाद, डमरू की गूंज और दर्जनों पुजारियों द्वारा एक लय में की जाने वाली आरती का दृश्य अलौकिक होता है।

  • टूरिस्ट टिप: शाम को 5:30 बजे तक घाट पर स्थान सुरक्षित कर लें या फिर गंगा नदी में बोट (नाव) बुक करके नदी की तरफ से आरती देखने का लुत्फ उठाएं।

सारनाथ: शांति और बौद्ध संस्कृति का वैश्विक केंद्र

भीड़भाड़ से दूर अगर आप शांति और इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं, तो मुख्य शहर से करीब 10 किमी दूर सारनाथ जरूर जाएं।

  • ऐतिहासिक महत्व: ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश (धम्मचक्कपवत्तन सुत्त) यहीं अपने पांच शिष्यों को दिया था।

  • क्या देखें: यहाँ का विशाल धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप और सारनाथ संग्रहालय मुख्य आकर्षण हैं। भारत का राष्ट्रीय चिह्न (अशोक स्तंभ के सिंह चतुर्मुख) यहीं से लिया गया है, जिसे संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।

अस्सी घाट: 'सुबह-ए-बनारस' का विहंगम अनुभव

वाराणसी के दक्षिणी छोर पर स्थित अस्सी घाट युवाओं और संस्कृति प्रेमियों का पसंदीदा ठिकाना है। यहाँ अस्सी नदी और गंगा का संगम होता है।

  • विशेष आकर्षण: अस्सी घाट अपनी 'सुबह-ए-बनारस' पहल के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सूर्योदय के समय होने वाली आरती, वैदिक मंत्रोच्चार, योग सत्र और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां पर्यटकों को एक अलग ही ऊर्जा से भर देती हैं।

  • संस्कृति और खानपान: घाट के किनारे पिज्जा से लेकर बनारसी चाय और कचौड़ी-जलेबी के कई मशहूर ठिकाने हैं।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) और नया विश्वनाथ मंदिर

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा 1916 में स्थापित BHU एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक है। यह केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक बड़ा टूरिस्ट स्पॉट भी है।

  • नया विश्वनाथ मंदिर (VT): विश्वविद्यालय परिसर के बीचों-बीच स्थित यह मंदिर बिड़ला परिवार द्वारा बनवाया गया था। इसका सफेद संगमरमर का शिखर दुनिया के सबसे ऊंचे शिखरों में गिना जाता है। यह मंदिर अपनी शांति और भव्य वास्तुकला के लिए जाना जाता है।

  • भारत कला भवन: इसी परिसर के अंदर स्थित यह संग्रहालय भारतीय कला, प्राचीन सिक्कों, चित्रों और हस्तलिपियों का एक अद्भुत खजाना है।

अन्य प्रमुख स्थल जिन्हें देखना न भूलें:

  • मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट: महाश्मशान, जहाँ जीवन और मृत्यु के शाश्वत सत्य को करीब से महसूस किया जा सकता है।

  • संकट मोचन हनुमान मंदिर: गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित ऐतिहासिक मंदिर।

  • तुलसी मानस मंदिर: जहाँ संगमरमर की दीवारों पर संपूर्ण रामचरितमानस उकेरी गई है।

  • रामनगर किला: गंगा पार स्थित काशी नरेश का ऐतिहासिक किला और संग्रहालय।

टूरिस्ट स्पेशल: बनारसी स्वाद और खरीदारी

बनारस की यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक आप यहाँ के स्ट्रीट फूड का स्वाद न चखें। सुबह के समय रामभंडार की कचौड़ी-जलेबी, दोपहर-शाम को गोदौलिया की लस्सी व टमाटर चाट, और अंत में बनारसी पान का स्वाद यात्रा को यादगार बना देता है। इसके अलावा, चौक और विश्वनाथ गली से बनारसी सिल्क साड़ियों और लकड़ी के खिलौनों की खरीदारी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहती है।
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