शहर के अमलीपारा वार्ड में स्वास्थ्य क्रांति के प्रतीक के रूप में खड़ा किया गया ‘हमर क्लिनिक’ भवन सोमवार की देर रात आग की लपटों में घिर गया। लाखों की लागत से बना यह सरकारी ढांचा जनता की सेवा शुरू करने से पहले ही राख के ढेर में तब्दील हो गया है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि कई ऐसे सवाल भी पैदा कर दिए हैं जिनका जवाब फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के पास नहीं है।
रहस्यमयी आग: जब शॉर्ट सर्किट की गुंजाइश ही नहीं
इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस भवन में आग लगी, वहां अभी तक बिजली का कनेक्शन भी नहीं जुड़ा था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आशीष शर्मा ने स्वयं पुष्टि की है कि भवन में विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं हुई थी।
"जब इमारत में करंट ही नहीं था, तो शॉर्ट सर्किट की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है। बिना किसी स्पष्ट स्रोत के इतनी भीषण आग लगना निश्चित रूप से जांच का विषय है।" - डॉ. आशीष शर्मा, CMHO
इस बयान ने मामले को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया है। यदि बिजली नहीं थी, तो रात के अंधेरे में आग कैसे लगी? क्या यह मानवीय भूल थी या किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा?
अस्पताल बना स्टोर रूम: खाक हुए महत्वपूर्ण दस्तावेज
पिछली सरकार के कार्यकाल में इस क्लिनिक का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि स्थानीय निवासियों को उनके घर के पास ही नि:शुल्क दवाइयां और प्राथमिक उपचार मिल सके। विडंबना देखिए कि उद्घाटन की बाट जोहता यह अस्पताल कभी मरीजों के काम नहीं आया, बल्कि इसे एक अस्थायी स्टोर रूम में तब्दील कर दिया गया था।
आग की इस घटना में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जुड़े सैकड़ों अहम दस्तावेज जलकर खाक हो गए हैं। हालांकि, अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि इनमें मरीजों का कोई संवेदनशील डेटा नहीं था, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड्स का इस तरह नष्ट होना कई संदेहों को जन्म दे रहा है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि क्या इन फाइलों के पीछे कोई ऐसा राज था जिसे मिटाने के लिए यह 'अग्निकांड' रचा गया?
प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
अमलीपारा वार्ड शहर का एक वीआईपी क्षेत्र माना जाता है, जहां कई जनप्रतिनिधियों के निवास हैं। इसके बावजूद, एक सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक हैरान करने वाली है।
सुरक्षा का अभाव: भवन के चारों ओर न तो कोई गार्ड तैनात था और न ही अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम।
सेवाओं में देरी: क्लिनिक तैयार होने के महीनों बाद भी स्टाफ की नियुक्ति और सेवाएं शुरू न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
साजिश की आशंका: स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के समय को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। आग रात के उस पहर में लगी जब सड़कों पर सन्नाटा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि क्लिनिक समय पर शुरू हो जाता, तो वहां स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी रहती और इस हादसे को समय रहते रोका जा सकता था।
वर्तमान स्थिति: पुलिस ने अज्ञात कारणों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि घटना के समय भवन के आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि तो नहीं थी।
सिस्टम की विफलता का प्रतीक
अमलीपारा का यह जलता हुआ क्लिनिक केवल एक भवन की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की उस जमीनी हकीकत की तस्वीर है, जहां बजट खपाकर ढांचा तो खड़ा कर दिया जाता है, लेकिन वे जनता के काम आने से पहले ही सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ जाते हैं। अब देखना यह है कि जांच में 'आग के पीछे का असली चेहरा' सामने आता है या यह फाइल भी राख की तरह ठंडी हो जाएगी।

