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आग… आग… !  66 घंटे तक बागबाहरा में सुलगती रही दहशत, रूपेश के एक फैसले ने टाल दी तबाही

आप सबको पता है कि 20 अप्रैल को बागबाहरा में तेंदूपत्ता से भरे एक ट्रक में आग लग गई और उससे पूरे मोहल्ले में दहशत का माहौल बना रहा। दहशत का यह साया 66 घंटे तक बना रहा, लेकिन यह और खौफनाक हो जाता यदि रूपेश शर्मा ने अपनी सूझ का परिचय न दिया होता। रूपेश की त्वरित सूझबूझ ने इस घटना को बड़े हादसे में बदलने से रोक दिया।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
25 Apr 2026, 05:34 PM
बागबाहरा
चश्मदीदों से सुनी आंखों देखी, आप भी पढ़िए...उस 66 घंटे की बागबाहरा के इस रिहायसी इलाके में क्या कुछ हुआ... शाम के करीब 7 बज रहे होंगे, गली में सामान्य दिनचर्या चल रही थी। पास के अग्रसेन भवन में शादी की रस्में पूरी की जा रहीं थीं। आसपास के घरों में लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। तभी अचानक ट्रक से उठते धुएं ने सबका ध्यान खींचा। पहले हल्का धुआं दिखा… किसी ने कहा कुछ नहीं होगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग भड़क उठी।
देखते ही देखते आग की लपटें घरों के उपर और दूर से दिखने लगी, तो पता चला कि अग्रसेन भवन के पास तेंदूपत्ता से भरा एक ट्रक आग की लपटों में घिर गया है। गली संकरी थी, दोनों ओर मकान सटे हुए थे। पास ही तंबाकू के गोदाम, मुर्गी फार्म और खपरे के मकान, जिनमें प्लास्टिक बिछी हुई थी और वहीं से सटे बिजली के दो ट्रांसफार्मर लगे थे। ऐसे में आग का फैलना पूरे मोहल्ले के लिए विनाशकारी साबित हो सकता था।
लोग घरों से बाहर भागने लगे… शादी की रस्में रोक दी गईं… हर कोई बस यही सोच रहा था कि अब क्या होगा। इसी अफरातफरी के बीच युवा रूपेश शर्मा मौके पर पहुंचा। उसने बताया कि वह घर पर खाना खाने बैठा था, बाहर शोर सुनकर वह घर से निकला तो देखा… आग ही आग। 
मौके पर मौजूद लोग बताते हैं कि रूपेश ने तुरंत अनहोनी को समझ लिया और अपनी सूझ का परिचय देते हुए कहा कि अगर गाड़ी यहां रही, तो पूरी गली को खतरा है। रूपेश ने पहले ड्राइवर को गाड़ी हटाने के लिए कहा, लेकिन स्थिति बिगड़ती देख उन्होंने खुद मोर्चा संभाला। धर्मशाला से पाइप लाकर पानी डालना शुरू किया और ड्राइवर पर लगातार दबाव बनाते रहे। लोग उन्हें रोक रहे थे। ट्रांसफार्मर पास है। खतरा है लेकिन वो नहीं रुके। कुछ ही देर में रूपेश ने निर्णायक फैसला लिया, गाड़ी को किसी भी हालत में रिहायशी गली से बाहर निकालना होगा। उनके मनोबल और हिम्मत के बीच ड्राइवर ने जोखिम उठाया और जलते ट्रक को गली से निकालकर खुले मैदान की ओर ले गया। जैसे ही ट्रक मैदान में पहुंचा, आग भयानक तरीके से भड़क गई… लेकिन तब तक गली सुरक्षित हो चुकी थी।
यही वह क्षण था जिसने पूरी कहानी बदल दी। अगर ट्रक गली में ही जलता रहता, तो आसपास के घर, धर्मशाला, डेयरी और गोदाम इसकी चपेट में आ सकते थे। गली से ट्रक निकलने के बाद भी आग पर काबू पाना आसान नहीं था। तेंदूपत्ता की वजह से आग लगातार 66 घंटे तक सुलगती रही। नगर पालिका की दमकल टीम ने 18 से 20 बार पानी डाला, लेकिन आग पूरी तरह शांत नहीं हो रही थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाहन मालिक को बार-बार तेंदूपत्ता खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने इंश्योरेंस का हवाला देकर मना कर दिया, जिससे स्थिति और लंबी खिंच गई। 48 घंटे तक किसी वरिष्ठ अधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने से लोगों में आक्रोश बढ़ा। इसके बाद मोहल्लेवासियों ने एसडीएम को आवेदन सौंपा और विधायक द्वारिकाधीश यादव का ध्यान आकर्षित किया।
अगले दिन प्रशासन हरकत में आया। एडीएम मार्कोले मौके पर पहुंचीं, अतिरिक्त संसाधन जुटाए गए और बाहरी दमकल वाहनों की मदद ली गई। इसके बाद सुनियोजित प्रयासों से 66 घंटे बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया।
हालांकि घटना के बाद भी कई सवाल बने हुए हैं कि आखिर तेंदूपत्ता समय पर खाली क्यों नहीं किया गया, और आग शांत होने के बाद उसे दूसरी जगह क्यों ले जाया गया। लेकिन इन सवालों के बीच एक बात पूरी तरह साफ है कि अगर उस वक्त रूपेश शर्मा ने ट्रक को गली से बाहर नहीं निकलवाया होता, तो आज बागबाहरा में बड़ा हादसा हो सकता था।
(जैसा चश्मदीदों ने कीर्तिमान को बताया)
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