कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आगामी खरीफ 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण हेतु दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं। वैज्ञानिकों द्वारा सतत कृषि विकास हेतु एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की अनुशंसा की गई है, जिसके अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद आदि उपाय भी सम्मिलित हैं।
उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी कृषकों को समानुपातिक मात्रा एवं समय पर उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य कास्त लागत में कमी, रासायनिक उर्वरकों के साथ हरी खाद, जैव उर्वरक, नीलहरित काई आदि के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति का संरक्षण करना तथा उर्वरकों के कृषि के अतिरिक्त उपयोग को रोकना है। साथ ही गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उर्वरक वितरण का प्रतिशत एवं वैकल्पिक व्यवस्था
कृषकों की श्रेणी अनुसार वितरण प्रणाली
जिले के सीमांत कृषक (2.5 एकड़ तक भूमि धारक) को निर्धारित मात्रा एकमुश्त प्रदान की जाएगी। लघु कृषक (2.5 से 5 एकड़ तक भूमि धारक) को यूरिया दो किश्तों में दिया जाएगा, जिसमें दूसरी किश्त पहली के 20 दिन बाद प्रदान की जाएगी। बड़े कृषक (5 एकड़ से अधिक भूमि धारक) को यूरिया तीन किश्तों में दिया जाएगा, जिसमें दूसरी और तीसरी किश्त क्रमशः 20-20 दिन के अंतराल पर दी जाएगी। गणना एवं वितरण प्रक्रिया का मानकीकरण
कृषकों को देय उर्वरक का निर्धारण बोरी की गणना के आधार पर किया जाएगा। विगत वर्ष (खरीफ 2025) में वितरित उर्वरक को आधार मानते हुए यूरिया का 80 प्रतिशत तथा डी.ए.पी. का 60 प्रतिशत भाग बोरी गणना में शामिल किया जाएगा। यदि गणना में पूर्णांक संख्या प्राप्त नहीं होती है, तो निकटतम पूर्णांक मान्य होगा। उदाहरणतः 7.2 या 7.8 बोरी होने पर क्रमशः 7 एवं 8 बोरी मान्य की जाएगी।

