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कृषि विभाग द्वारा खरीफ 2026 के लिए  एवं संतुलि निर्देश
कृषि विभाग द्वारा खरीफ 2026 के लिए एवं संतुलि निर्देश

किसान कल्याण : जैविक एवं वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा, आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

खरीफ 2026 के लिए कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देते हुए रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद एवं हरी खाद के उपयोग पर जोर दिया गया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 19 May 2026, 12:45 PM · अपडेट: 25 May 2026, 03:45 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आगामी खरीफ 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण हेतु दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं। वैज्ञानिकों द्वारा सतत कृषि विकास हेतु एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की अनुशंसा की गई है, जिसके अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद आदि उपाय भी सम्मिलित हैं।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी कृषकों को समानुपातिक मात्रा एवं समय पर उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य कास्त लागत में कमी, रासायनिक उर्वरकों के साथ हरी खाद, जैव उर्वरक, नीलहरित काई आदि के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति का संरक्षण करना तथा उर्वरकों के कृषि के अतिरिक्त उपयोग को रोकना है। साथ ही गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

उर्वरक वितरण का प्रतिशत एवं वैकल्पिक व्यवस्था

खरीफ 2025 में वितरित उर्वरक की तुलना में खरीफ 2026 में यूरिया की 80 प्रतिशत मात्रा एवं डी.ए.पी. की 60 प्रतिशत मात्रा का ही वितरण किया जाएगा। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा पारंपरिक आपूर्ति होने पर दी जाएगी, अन्यथा नैनो यूरिया के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इसी प्रकार डी.ए.पी. की शेष 40 प्रतिशत मात्रा वैकल्पिक एन.पी.के. उर्वरकों अथवा नैनो डी.ए.पी. के माध्यम से दी जाएगी। किसी भी स्थिति में नैनो उर्वरक लेने के लिए कृषकों को बाध्य नहीं किया जाएगा, यह पूर्णतः वैकल्पिक रहेगा।

कृषकों की श्रेणी अनुसार वितरण प्रणाली

जिले के सीमांत कृषक (2.5 एकड़ तक भूमि धारक) को निर्धारित मात्रा एकमुश्त प्रदान की जाएगी। लघु कृषक (2.5 से 5 एकड़ तक भूमि धारक) को यूरिया दो किश्तों में दिया जाएगा, जिसमें दूसरी किश्त पहली के 20 दिन बाद प्रदान की जाएगी। बड़े कृषक (5 एकड़ से अधिक भूमि धारक) को यूरिया तीन किश्तों में दिया जाएगा, जिसमें दूसरी और तीसरी किश्त क्रमशः 20-20 दिन के अंतराल पर दी जाएगी। गणना एवं वितरण प्रक्रिया का मानकीकरण

कृषकों को देय उर्वरक का निर्धारण बोरी की गणना के आधार पर किया जाएगा। विगत वर्ष (खरीफ 2025) में वितरित उर्वरक को आधार मानते हुए यूरिया का 80 प्रतिशत तथा डी.ए.पी. का 60 प्रतिशत भाग बोरी गणना में शामिल किया जाएगा। यदि गणना में पूर्णांक संख्या प्राप्त नहीं होती है, तो निकटतम पूर्णांक मान्य होगा। उदाहरणतः 7.2 या 7.8 बोरी होने पर क्रमशः 7 एवं 8 बोरी मान्य की जाएगी।

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