कहते हैं कि खेती में यदि मेहनत के साथ नई तकनीक और सही मार्गदर्शन जुड़ जाए, तो किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकता है। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरनाईदादर की प्रगतिशील कृषक मीना पटेल ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। वर्षों तक पारंपरिक धान की खेती करने के बाद उन्होंने आधुनिक उद्यानिकी खेती की ओर कदम बढ़ाया और ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से उल्लेखनीय सफलता हासिल की। आज उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
मीना पटेल के पास लगभग 4.13 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। पहले वे मुख्य रूप से धान की खेती करती थीं, लेकिन लगातार बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे के कारण आय अपेक्षित नहीं हो पा रही थी। इसी दौरान उद्यान विभाग के अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक तकनीक आधारित उद्यानिकी खेती अपनाने की सलाह दी। विभागीय मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर प्रदर्शन योजना का लाभ लिया। इसके तहत उन्होंने एक एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड टमाटर की खेती शुरू की।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक से बढ़ा उत्पादन
ग्राफ्टेड टमाटर की खेती में आधुनिक तकनीकों का विशेष उपयोग किया गया। खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई गई, जिससे कम पानी में बेहतर सिंचाई संभव हो सकी। साथ ही मल्चिंग तकनीक के उपयोग से मिट्टी में नमी बनी रही और खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिली। इन तकनीकों के कारण फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई और उत्पादन में भी बड़ा इजाफा देखने को मिला। उद्यान विभाग द्वारा उन्हें 30 हजार रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया, जिससे उन्नत खेती अपनाने में आर्थिक सहायता मिली।
जहां पहले धान की खेती से प्रति एकड़ लगभग 20 क्विंटल उत्पादन होता था और आय सीमित रहती थी, वहीं ग्राफ्टेड टमाटर की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति बदल दी। आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के चलते उन्हें प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल टमाटर का उत्पादन प्राप्त हुआ। यह उत्पादन सामान्य खेती की तुलना में कई गुना अधिक रहा।
ओडिशा मंडियों में मिली बेहतर कीमत
उत्पादित टमाटर को पिथौरा सहित ओडिशा की विभिन्न मंडियों में बेचा गया, जहां उन्हें अच्छा बाजार मूल्य प्राप्त हुआ। मीना पटेल बताती हैं कि पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 36 हजार 600 रुपये तक की आय होती थी, लेकिन ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से सभी खर्च निकालने के बाद करीब 2 लाख 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। इस तरह उनकी आय में लगभग सात गुना वृद्धि दर्ज की गई।अब दूसरे किसानों के लिए बनीं प्रेरणा
मीना पटेल की इस सफलता ने पूरे क्षेत्र में नई सोच पैदा की है। अब आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। किसान आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और ग्राफ्टेड पौधों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में यह बदलाव किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाकर योजनाओं का लाभ लें, तो कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल किया जा सकता है। मीना पटेल का उदाहरण इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

