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रविशंकर सागर जलाशय
रविशंकर सागर जलाशय
छत्तीसगढ़

गगरेल बांध का पानी बना वरदान : कुकरा के कठवा फाल में दिखा ‘मिनी भेड़ाघाट’ जैसा अद्भुत नजारा

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और जल संकट के बीच गंगरेल बांध (रविशंकर सागर) से महानदी मुख्य नहर के जरिए छोड़ा गया पानी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। इससे सूखे तालाब भर रहे हैं, भूजल स्तर बढ़ रहा है और पशुओं के लिए भी पानी उपलब्ध हो रहा है। कुकरा गांव के पास कठवा फाल में नहर का पानी लगभग 15 फीट की ऊंचाई से गिरकर सफेद झाग जैसा “दूधिया” दृश्य बना रहा है, जिसे लोग ‘मिनी भेड़ाघाट’ कह रहे हैं। यह मनमोहक दृश्य लोगों को आकर्षित कर रहा है और क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
18 Apr 2026, 07:24 PM
धमतरी

छत्तीसगढ़ में इस समय पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में जलस्तर नीचे चला गया है, तालाब सूखने की कगार पर हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। ऐसे हालात में गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) से महानदी मुख्य नहर के माध्यम से छोड़ा गया पानी लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम साबित नहीं हो रहा है।

यह जलधारा न केवल सूखे पड़े तालाबों और जलस्रोतों को फिर से भर रही है, बल्कि गांवों में निस्तारी की समस्या को भी काफी हद तक दूर कर रही है। नहरों में लबालब बहता पानी इन दिनों ऐसा दृश्य प्रस्तुत कर रहा है, मानो मानसून समय से पहले ही धरती पर उतर आया हो। खेतों के किनारे, गांवों के बीच और रास्तों के आसपास बहती यह जलधारा ग्रामीणों के लिए राहत और आशा दोनों का प्रतीक बन गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जहां कुछ दिन पहले तक पानी के लिए हाहाकार जैसी स्थिति थी, वहीं अब नहरों में तेज बहाव ने माहौल ही बदल दिया है। सूखे पड़े तालाबों में पानी भरने से न केवल मनुष्यों को राहत मिली है, बल्कि पशुधन के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध हो गया है। इसके चलते पशुपालकों और किसानों ने भी राहत की सांस ली है।

रविशंकर सागर जलाशय

इसी बीच कुकरा गांव के पास एक अनोखा और मनमोहक प्राकृतिक नजारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले स्थित कठवा फाल में जब महानदी मुख्य नहर का पानी लगभग 15 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है, तो वहां का दृश्य बेहद मनोरम हो उठता है। तेज गति से गिरता हुआ पानी चट्टानों से टकराकर सफेद झाग में बदल जाता है और दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो दूध की धारा बह रही हो। इस दृश्य की तुलना लोग अक्सर जबलपुर के प्रसिद्ध भेड़ाघाट स्थित दूधिया जलप्रपात से कर रहे हैं। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के बीच यह “मिनी भेड़ाघाट” जैसा दृश्य राहगीरों और ग्रामीणों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं और तस्वीरें तथा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।

कठवा फाल का यह नजारा अब केवल एक जलप्रपात नहीं रह गया है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान और चर्चा का विषय बन चुका है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यदि इसे सही ढंग से विकसित किया जाए तो यह स्थान पर्यटन के नक्शे पर भी अपनी जगह बना सकता है।

महानदी जल संकट

महानदी मुख्य नहर का यह प्रवाह न केवल जल संकट को कम कर रहा है, बल्कि भूजल स्तर को भी सुधारने में मददगार साबित हो रहा है। आसपास के गांवों में कुओं और बोरवेल का जलस्तर बढ़ने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे आने वाले दिनों में और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, भीषण गर्मी के इस दौर में कुकरा गांव के पास बहता यह “दूधिया प्रपात” ग्रामीणों के लिए राहत, जीवन और उम्मीद का स्रोत बन गया है। यह दृश्य न केवल प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही जल प्रबंधन से सूखे हालात में भी जीवन को फिर से हराभरा किया जा सकता है।

यहां सबसे पहले और सबसे ज्यादा असर पड़ता है

1 धमतरी ब्लॉक के आसपास के गांव

कुरुद क्षेत्र के कई गांव

नहर किनारे बसे छोटे-छोटे कृषि गांव

इसी क्षेत्र में पानी का सीधा उपयोग सिंचाई और तालाब भरने में होता है।

2. कुरुद–मगरलोड क्षेत्र

मगरलोड ब्लॉक के गांव

कुरुद के निचले बहाव वाले गांव

नहर से जुड़ी शाखा नहरों के किनारे बसे गांव

यहां पानी खेतों तक ज्यादा पहुंचता है और भूजल रिचार्ज भी होता है।

3. महानदी डाउनस्ट्रीम (गरियाबंद दिशा के कुछ हिस्से)

नदी के बहाव क्षेत्र के गांव

निचले इलाकों के छोटे गांव और बस्तियां

तालाबों और प्राकृतिक जलस्रोतों से जुड़े क्षेत्र

यहां पानी सीधे नहर से कम और रिसाव/नदी प्रवाह से ज्यादा फायदा देता है।

4. नहर कमांड एरिया के अन्य गांव

शाखा नहरों से जुड़े दर्जनों छोटे गांव

सिंचाई विभाग के कमांड एरिया में आने वाले खेतिहर गांव

जहां बोरवेल और कुएं इस नहर पर निर्भर हैं

पानी का असली फायदा कैसे होता है

खेतों की सिंचाई

सूखे तालाबों का भरना

कुएं और बोरवेल का रिचार्ज

पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता

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