खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भारतीय हितों से जुड़े जहाजों पर फायरिंग की घटना सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान से तत्काल जवाब तलब किया है।
सूत्रों के अनुसार, शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो वाणिज्यिक जहाजों के पास अचानक गोलियों की आवाज गूंजी। बताया जा रहा है कि इनमें से एक जहाज का भारत से सीधा संबंध था—या तो उसमें भारतीय क्रू मौजूद था या वह भारतीय कंपनी से जुड़ा था।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस फायरिंग में किसी भी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई और जहाज को भी कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा। घटना के बाद जहाजों को सुरक्षित मार्ग से आगे बढ़ाया गया।
ईरान ने कड़ा किया सैन्य नियंत्रण
इसी बीच, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपना सैन्य नियंत्रण और सख्त कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक -
- कई इलाकों में नौसैनिक गश्त बढ़ाई गई
- जहाजों की आवाजाही को सीमित किया गया
- कुछ समय के लिए मार्ग को आंशिक रूप से बंद भी किया गया
यह कदम क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा तनाव और संभावित खतरों के मद्देनजर उठाया गया बताया जा रहा है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
घटना के बाद विदेश मंत्रालय भारत ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से ईरानी अधिकारियों से संपर्क किया है।
MEA ने स्पष्ट किया है कि -
- भारतीय जहाजों और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है
- घटना की विस्तृत जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है
- खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की निगरानी बढ़ाई जा रही है
क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है-
- वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है
- खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य मार्ग है
ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर असर डालता है।
वैश्विक असर और बढ़ती चिंता
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। समुद्री बीमा दरें बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे शिपिंग लागत प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबी चली, तो इसका असर भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।