छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला जेल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ न्यायिक हिरासत में बंद एक 38 वर्षीय विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल व्याप्त है।
घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तमनार थाना क्षेत्र के कठरापाली निवासी सुरेश रात्रे को बीते 30 अप्रैल को अवैध शराब बिक्री के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर रायगढ़ जिला जेल भेज दिया गया। जेल प्रशासन का दावा है कि अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण सुरेश को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों के गंभीर आरोप
इस मामले में सुरेश के परिजनों ने जेल प्रबंधन पर जानकारी छिपाने और लापरवाही बरतने का संगीन आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि:
जब वे सुरेश से मिलने जेल पहुँचे, तो उन्हें गुमराह किया गया कि उसका इलाज चल रहा है।
काफी खोजबीन के बाद जब वे अस्पताल पहुँचे, तो सुरेश का शव मर्चुरी में मिला।
परिजनों को अंदेशा है कि सुरेश की मौत जेल के भीतर ही हो चुकी थी और प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए इसे अस्पताल ले जाने का नाटक कर रहा है।
जांच की मांग और उग्र आंदोलन की चेतावनी
घटना से आक्रोशित मृतक के परिजनों और भीम आर्मी भारत एकता मिशन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक (SP) के नाम ज्ञापन सौंपा है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
उच्च स्तरीय जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए।
CCTV फुटेज: जेल परिसर के भीतर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
दोषियों पर कार्रवाई: मौत के लिए जिम्मेदार जेल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त कदम उठाए जाएं।
भीम आर्मी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में पारदर्शी जांच नहीं की और परिजनों को न्याय नहीं मिला, तो वे पूरे जिले में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है, लेकिन जेल के भीतर हुई इस मौत ने एक बार फिर कैदियों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
